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#व्यंग्य - कोयले की चोरी और गब्बर

​पिछले सात दिनों से काली पहाड़ी पर बिजली का अता-पता नहीं था। गब्बर ने पिछले सात दिनों से अर्नब गोस्वामी को नहीं देखा था। गब्बर अर्नब गोस्वामी का बहुत बड़ा फैन था। रोज रात को गब्बर अगर डाका डालने नहीं जाता था तो वो खाना अर्नब गोस्वामी के न्यूज़ के साथ ही खाता था। लेकिन बिजली की किल्लत से गब्बर और उसके गिरोह के कई लोग परेशान थे। इतनी ज्यादा गरमी पड़ रही थे की उससे सांभा को घमौरियां निकल आई थी। गब्बर ने कालिया और उसके साथ दो और लोगो को रामगढ़ बैटरी चार्ज करने के लिए भेज दिया। कालिया रामगढ़ से खाली हाथ ही आ गया क्योंकि रामगढ़ में भी पिछले कई दिनों से बिजली नहीं आ रही थी। कालिया को इस बार गोली नहीं खानी पड़ी क्योंकि वो अपने साथ बिजली ना आने की पर्याप्त जानकारी लेकर आया था।

कालिया की जानकारी के अनुसार सरकारी कंपनिया कोयले की कमी के कारण बिजली नहीं पैदा कर पा रही थी। कोयले की माइनिंग पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय को ये रोक इस लिए लगनी पड़ी क्योंकि कोयले की चोरी हो रही थी और करोड़ो हजारो रुपयो का कोयला चोरी हो चूका था। गब्बर कोयले की चोरी का मामला सुनकर हक्का - बक्का रह गया। कोयला हमारे भारत की भू संपदा है उसका चोरी होना कोई मामूली बात नहीं थी। गब्बर सोच-सोच कर हैरान था की कोयला चोरी कैसे हुआ? गब्बर मन ही मन सोचने लगा की एक गाँव लुटाने के लिए उसे कई दिनों तक तैयारी करनी पड़ती है, दरोगा जी को पैसे खिलाने पड़ते है और तब जाकर गाँव लुटाने में सफलता मिलती है। पिछली बार रामगढ़ से दस बोरियां आनाज की लाने में बड़ा खून खराबा हो गया था और यहाँ करोड़ो हजारो रुपयो का कोयला चोरी हो चूका था।

गब्बर ने भी अपने कॅरियर की शुरवात मालगाड़ी मे से कोयला चुराने से कि थी  पर कभी भी उसे कोयला बेचने के बाद उसे हज़ार रुपये से ज्यादा नहीं मिला क्योंकि उससे ज्यादा का कोयला चुराकर बेचना आसन नहीं था। ऊपर से चोरी में शामिल सभी लोगो का हिस्सा देने के बाद हाथ में बहुत कम पैसे बचते थे। गब्बर कोयले की चोरी के बारे में सोच सोच कर परेशान हो रहा था क्योंकि वो जानना चाहता था की कोयला किस तरह चुराकर ले जाया गया और किस बन्दे ने करोडो हज़ार रुपये के कोयलों की चोरी की और किस बन्दे ने करोडो रुपये के कोयले को हाथो हाथ खरीद लिया। गब्बर जानता था की कोयला चुराना कोई आसन काम नहीं है। कोयला चुराकर बाज़ार तक पहुचाना काफी कठिन था। गब्बर ने कालिया से कोयला चोरी होने का मास्टर प्लान लेकर आने को कहा। कालिया पैसे लेकर एक न्यूज़ चैनल के वहा मास्टर प्लान लेने पहुंच गया।


कालिया वापस कालीपहाड़ी पर आया और गब्बर को बताया की कुछ लोगो ने औने-पौने दामो पर कोयले की खदानों को प्राइवेट कंपनिया को बेच दिया था जिससे सरकार को करोडो रुपयो का चुना लगा गया है। कोयला सिर्फ सरकारी पन्नो पर चोरी हुआ है। असली कोयला अभी भी वही पड़ा है जमीन के नीचे, पर आज नहीं तो कल वो जमीन के नीचे से चोरी हो जायेगा। गब्बर भी अब बड़ी कोयला चोरी के बारे मे सोचने लगा। वो भी अब सिर्फ पन्नो पर कोयला चोरी कर के पैसा कमाना चाहता था। गब्बर को लगा की पन्नो पर कोयला चोरी करना आसान है पर उसे पता नहीं था की पन्नो पर कोयला चोरी करने के लिए उसे पहेले राजीनीति मे आना पड़ेगा और कोयला चोरी के लिए कम से कम विधानभा का चुनाव जितना पड़ेगा जो अपने आप मे बहुत बड़ा काम है परन्तु गब्बर जैसे ​डाकू के लिए भारत की राजनीती में आना कोई कठिन काम नहीं था। 

एक राजनितिक पार्टी से जुगाड़ करके गब्बर ने राज्यशभा में सदस्यता प्राप्त कर ली और आज-कल कई ऐसे गब्बर भारत को लूट लूट कर कंगाल और भारत की जनता को बदहाल कर रहे है। 


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