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#कविता - मेरा हमदम

आंसुओ के बहने से नाराज हो जाता है,
हँसने पर वज़ह तलब करता है मेरा हमदम।
झुठ कहने से रुठता है,
सच बोलने कि इजाजत भी नहीं देता मेरा हमदम।।

दुःख के पल बहुत है जिंदगी में मेरी,

सुख कि घड़ी ढूँढता है मेरा हमदम।
झुठ कहने से रुठता है,
सच बोलने कि इजाजत भी नहीं देता मेरा हमदम।।

बुराई कई सौ है मुझमे,
अच्छाई ही सिर्फ बताता है मेरा हमदम।
झुठ कहने से रुठता है,
सच बोलने कि इजाजत भी नहीं देता मेरा हमदम।।

मौत कि चाह नहीं मुझमे,

जीने का हिसाब लेता है मेरा हमदम।
झुठ कहने से रुठता है,
सच बोलने कि इजाजत भी नहीं देता मेरा हमदम।।

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