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#कविता - सुना है नई सुबह हुई है आज

सुना है नई सुबह हुई है आज,
कही दूर घोर अँधेरा छंटा है।

सोने की चिड़िया डाल पर बैठी,
नए युग का संदेशा दे रही है।

सुना है कालियां खिलखिला रही,
भवरे भी खुशियाँ मन रहे है।

धरती अब हरियाली ओढ़ेगी,
नदियाँ दूध की बाढ़ ले आएँगी।

सुना है खुशियाँ घर घर अब,
दुःख ढूंढते रह जायेंगे।

जाति - पाति का बंधन कमजोर पड़ा,
उन्नति - विकास मजबूत हुआ है।

सुना है नई सुबह हुई है आज,
कही दूर घोर अँधेरा छंटा है।

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