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कट्टर सोच


मुम्बई के मोहम्मद अली रोड से नागपाड़ा जाने वाले रस्ते पर मोटर सवार लडको को पुलिस को गरियाते - निकलते हुए आप देख सकते है। इन मनचलो कि कौम बता कर मै पुरे कौम का नाम ख़राब नहीं कर सकता, क्योंकी इस तरह के लोग हर कौम में मिल जाते है। बेचारा ट्रैफिक पुलिस वाला सिटी बजा कर ट्रैफिक मोड़ने कि कोशिश तो करता है परन्तु गाली खाने के अलावा बेचारा कुछ नहीं कर पाता। उसके ही साथ वाले पुलिस वाले मुम्बई के किसी दूसरे ईलाके में लोगो पर ट्रैफिक तोड़ने के लिए रॉब झाड़ रहे होते है और मोहम्मद अली रोड पर ए बेचारा अपनी पोस्टिंग को कोस रहा होता है। भगवान से रोज यही दुआ करता है कि जल्द से जल्द पोस्टिंग कही और बदली करवा दे ।

मुम्बई लोकल में चर्चगेट से विरार जाने वाली ट्रेन में शाम के समय में मरीन लाइन्स से चार पाँच लडको का ग्रुप चढ़ता है उनकी शक्ल सूरत और हाव भाव से आप उनके कौम का पता लगा सकते है। गेट पे खड़े लोगो को अंदर ठेलकर वो खुद गेट पर अपना हक़ जमा लेते है। जो हटने से मन करे वो उससे गली गलोज करते है और मारपीट कर अंदर धकेले देते है। बेचारा वो आदमी जो अब मर खा चूका है वो उनकी कौम को मन में कोसता हुआ अंदर कि तरफ चला जाता है। दूसरे दिन से वो मार खाया आदमी उस समय कि लोकल को नहीं पकड़ता है। ऐसे मर खाए कई बेचारे मुम्बई लोकल में रोज सफर करते है और मन ही मन उन गुंडों कि कौम को गरियाते है।

मुम्बई में एक बड़े नेता कि मृत्यु के बाद मुम्बई का एक तबका ऐसा भी था जो अचानक से अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगा। उन लोगो का ए मानना था की नेताजी के कारण एक कौम के कुछ ऐसे लोग थे जो उनका का बुरा करने से डरते थे। लोगो को डर था की अब नेताजी की मौत के बाद उन्हें कोई बचानेवाला नहीं था। उनमे से कई लोग ऐसे थे जो मुम्बई दंगो के भुक्तभोगी थे। और इनमे से कुछ लोग वो है जिन्होंने उस पुलिस वाले को गली खाते देखा है। इनमे से कुछ वो लोग है जो मुम्बई लोकल में एक कौम के लोगो से मार और गली खाते है। उन्हें ए तो पता है कि इस कौम के सब लोग ऐसे नहीं है परन्तु उन्हें कोई ऐसा भी चाहिए जो इन्हे थोडा डरा धमका के सही रख सके।

भारत - पाकिस्तान के क्रिकेट मैच में अगर भारत की जीत हो जाए तो तो मुम्बई के कई घर खुशी मनाते है और कई घर इस बात से गमजदा हो जाते है। भारत के क्रिकेट मैच हारने पर यदि आपको बम के धमाको कि आवाज़ में खुशिया मानते लोग दिख जाये तो आप इस बात से चौंक मत जाइएगा। कुछ लोगो के लिए ए बहुत ही आम बात है परन्तु एक तबका ऐसा भी है जो भारत कि हार पर खुशियाँ मनाने वालो से बदला लेना चाहता है। उसे ऐसा लगता है कि कैसे कोई भारत में रहकर भारत की हार पर खुशियाँ मना सकता है। उसका मन करना तो बहुत कुछ चाहता है परन्तु शासन और कानून से डर का चुप बैठ जाता है। कितने दिन चुप बैठेगा ए देखने वाली बात होगी।

यदि आप सोचते है कि ऊपर लिखी बांते मेरे मन कि कल्पनाओ से प्रेरित है तो आप गलत सोचते है। ए एक वो सच्चाई है जिसे नेता, मीडिया और लोग किसी न किसी वजह से नजरअंदाज  करते रहते है। कोई चारो तरफ शांति बनी रहे इस लिए इसे नजरअंदाज करता है, कोई अपने वोट बैंक को बचाने के लिए इसे नजरअंदाज  करता है। ऊपर चर्चित लोग हर कौम में मिलते है पर बात जब दो कौम कि आती है तो धर्म सबसे पहेले लोगो को बांटता है। अगर मेरे ही धर्म का इंसान मुझपर जुर्म करे तो, मै उसे कभी धर्म या कौम कि नज़रो से नहीं देखता परन्तु अगर कोई दूसरे कौम का इंसान मुझपर जुर्म करे तो वो धर्म, कौम और सांप्रदायिकता का रंग ले लेता है।

भारत के लोग और उनकी मानसिकता को लेकर जवाब और सवाल चलते रहेंगे परन्तु एक बहुत बड़ा तबका भारत में ऐसा है जो कट्टर सोच को ज्यादा तव्वजो देता है, मुझे पता है कई लोग मेरी बांतो से सहमत नहीं होंगे परन्तु याद रखना जब भारत के एक खगोलशास्त्री ने पृथ्वी गोल है इस बात का जिक्र किया लोगो ने उसे सिरे से नकार दिया और उसे पागल करार कर दिया और आज हम सब जानते है कि पृथ्वी गोलाकार है या चौकोनाकर। कट्टर सोच की परिकल्पना सही नहीं है परन्तु सच्चाई को मानकर उसमे बदलाव लाने कि कोशिश करनी चाहिए। एक संपन्न भारत के लिए हमें कट्टर सोच कि उपज का हल ढूंढना होगा।


धर्मनिरपेक्ष कौन है? जो धर्म जिस जगह कम संख्या में है वो धर्म उस जगह पर धर्मनिरपेक्ष है। मैं तो किसी ऐसे वैज्ञानिक की खोज में हूँ जो मुझे यादाश्त मिटाने का यंत्र बनाकर दे। मैं उस यंत्र से सभी के धर्म की व्यख्या मिटाकर सिर्फ मानवता धर्म की व्यख्या लिख दूंगा। 

नोट : मैं हर जाति धर्म और समुदाय का आदर करता हुँ। इस लेख से किसी जाति धर्म को आहत करने का कोई इरादा नहीं है।


अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नए व्यंग के साथ। 

टिप्पणियाँ

  1. सत्य कहा मित्र, जो धर्म जिस जगह संख्या में कम है... वो धर्मनिरपेक्ष है. बहुत ही कड़वा सच. कुछ क्या बड़ी तादाद में लोग आपके इस विचार को गरियाते मिलेंगे.
    और हाँ, याददाश्त मिटाने के यन्त्र परमात्मा बीच बीच में देता है. तब सभी सब भूल के जान बचाने में जुट जाते है.. लेकिन जान बची और पेट भरा, बस फिर चालू...

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    1. धर्मनिरपेक्ष कौन है? जो धर्म जिस जगह कम संख्या में है वो धर्म उस जगह पर धर्मनिरपेक्ष है।

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