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क्या पाकिस्तानी कार दुश्मन है ?

कुछ दिन पहले एक भारतीय कार को जब एक राज्य का ब्रैंड अम्बेस्डर बनाया गया तो कार की नागरिकता को लेकर खूब बवाल हुआ। कार तो अमूमन भारतीय है परन्तु उसने हाल ही में अपने कुछ कल पुर्जो की मरम्मत करवाई थी और उसमे लगे अधिकतर कल पुर्जे पाकिस्तान से आए थे। कार के कल पुर्जो के कारण कार की नागरिकता को पाकिस्तानी माना जाना चाहिए ऐसी कुछ और बहुत लोगो की राय थी। हमारी पुरानी बस्ती में भी इस बात को लेकर बवाल मचा था की, क्या पाकिस्तानी कार दुश्मन है ? क्यों हिंदुस्तान का एक तबका पाकिस्तानी कार को दुश्मन मानता है। इस बात की खोज बिन से जो तथ्य बाहर आए, वो बहुत ही चौका देनेवाले थे , तो उन सभी तथ्यों पर बारी - बारी से नजर डालते है।

हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच होने वाला कार रेस का मुक़ाबला हमेशा धर्म और अधर्म की लड़ाई के रूप में परोसा गया है। समाचार पत्र हो या न्यूज़ चैनल सभी हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच होने वाले रेस को एक पौराणिक कथा के रूप में परोसते है। हिंदुस्तानी नजरिए से भारत की कार को धर्म और पाकिस्तान की कार को अधर्म के पक्ष में रख्खा जाता है। कार मुकाबले के विश्व कप में तो खबरों के विक्रेता हिंदुस्तान और पाकिस्तानी मुक़ाबलों पे तो नए नए धर्म ग्रन्थ लिख देते है। शुक्रवार के दिन पाकिस्तान को हराना सबसे गर्व की बात मानी जाती है। हिंदुस्तानी कार के जीतने पर जिस तरह हर्षो उल्लास मनाया जाता है वो इस बात को सत्यापित कर देता है की ए सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं धर्म और अधर्म की लड़ाई है।

सिनेमा भारत का एक अहम हिस्सा है। भारत की आजादी से लेकर आज तक भारत और पाकिस्तान के बीच हुई कार लड़ाई के ऊपर बहुत सी फिल्मे बनी। हर फिल्म में पाकिस्तानी कार को असत्य का साथ देते हूए दिखाया गया। भारत की कार पाकिस्तनी करो को कुचलकर यहाँ से वहाँ फैंक देती है। सभी फिल्मो में भारत की कार को सत्य और अहिंसा का मसीहा दिखाया गया है। एक फिल्म में तो भारत की कार से पाकिस्तान की राजधानी में घुसकर वहाँ से अपने प्रियंवदा कार को छुड़ा कर ले आया। वो हैंड पंप उखाड़ने वाला सीन तो आपको याद ही होगा। फिल्मो ने हमेशा से पाकिस्तानी कारों को इंसानियत का दुश्मन बताया और दर्शको को ए फिल्मे बेचकर खूब पैसा कमाया।

नेताजी --------------- नेताजी के बारे में जितना कुछ लिखू कम है। जात-पात और धर्म की राजनीती से आगे न बढ़ने वाले नेताजी ने हमेशा से पाकिस्तानी कारों के ऊपर आघात किया। नेताजी ने हमेशा कहा की पाकिस्तानी कार हमारे देश के लिए ठीक नहीं है। पाकिस्तनी कारों के कत्ले आम को चुनावो में पूरी तरह से भुनाया गया और वोट बटोरे गए। नेताजी ने हर तरह की पाकिस्तनी कारों को एक पलड़े में रख कर देखा और दिखाया। पाकिस्तान की आम कारों और हिंसक कारों को नेताजी ने एक समान बताया। बेचारी पाकिस्तानी कार जिसने कभी अपने गाँव से बाहर निकलकर आगे की दुनिया नहीं देखी, हमारे नेताजी ने उसे भी आतंकवादी करार कर दिया। 


क्या पाकिस्तानी कार दुश्मन है ?

समाचार पत्र, खबरिया चैनल, भारतीय सिनेमा और नेताजी ने पाकिस्तानी कारों की जो रूप रेखा का चित्रण किया उस हिसाब से तो पाकिस्तानी कार हमारी कट्टर दुश्मन है। परन्तु जब भारत के लोगो ने एक भारतीय कार जिसके कल पुर्जे पाकिस्तान से आए है उसके ब्रैंड अम्बेस्डर बनने पर सवाल उठाया तब समाचार पत्र, खबरिया चैनल, भारतीय सिनेमा और नेताजी सभी इस बात का विरोध करते दिखे, अरे भाई पहले आप ने ही हमें पाकिस्तानी कार को दुश्मन ​बताकर खूब पैसे कमाए। आप लोगो ने कई विदेशी कारों को ए ही कहकर भारतीय बना दिया की उसमे लगे हिस्से भारतीय है और अब पाकिस्तानी कल पुर्जो वाली कार को भारतीय बता रहे है। आपके मापदंड का पैमान हमें भी भेजिए।


अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नए व्यंग के साथ। 

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