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हनुमान जी का आधार कार्ड

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषण:।
कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिर जीविन:॥

अर्थात अश्वत्थामा, बलि, वेदव्यास, विभीषण, हनुमान, कृपाचार्य तथा परशुराम ये सात अमर लोग है और ये सृष्टि के अंत तक जीवित रहेंगे। कक्षा में गुरूजी आज इस श्लोक को पढ़ाकर उसका मतलब समझा रहे थे। पप्पू पांडे ने आज तक अपनी किसी भी क्लास में कोई बात इतनी ध्यान से नहीं सुनी थी परन्तु ए शलोक उसने अपने दिमाग में उतार दिया और गुरूजी से बोला आप तो उस दिन पढ़ा रहे थे की मृत्यु ही जीवन का अंतिम सत्य है तो ए सात लोग अमर कैसे है ? गुरूजी ने कहा पढ़ना है तो चुप चाप पढ़ो नहीं तो घर का रास्ता नापो।

पप्पू स्कूल से छूटते ही हनुमान जी के मंदिर में पहुँच गया और हनुमान जी को बोला की आप यदि अमर हो तो मुझे उसका प्रमाण दो। हनुमान जी भी पप्पू पांडे की बात सुन रहे थे और मन ही मन सोच रहे थे कैसे बुरे दिन आ गए है की सब मुझसे मेरे होने का प्रमाण मांगते है। तभी पप्पू ने कहा आपको अपनी जन्म तिथि के साथ पैन कार्ड, आधार कार्ड या फिर वोटर कार्ड देना होगा। भगवान भी बच्चे के सवाल पर मुस्कुरा रहे थे और सोच रहे थे इंसान जैसे-जैसे शिक्षित होता जा रहा है वो मेरे वजूद पर सवाल उठाते जा रहा है और अपने पतन की तरफ बढ़ता जा रहा है।

पप्पू पांडे घर पहुंचकर अपने पिताजी फेंकू पांडे के पास गया और आज स्कूल में हुई सारी घटना और फिर अपनी हनुमान मंदिर में जाने वाली बात पिताजी को बता दी। फेंकू पांडे सिर्फ हनुमान के नाम का प्रमाण मांग रहा था क्योंकि पोगो पर उसने बाल हनुमान फिल्म कई बार देखी थी और वो बाल हनुमान से काफी प्रभावित था इसलिए उनसे मिलकर उनके जैसा बनना चाहता था। और तभी फेंकू पांडे के पीए ने आकर कहा की एक बेनामी जमीन का पट्टा करना है और हमारे पास अब कोई जाली दस्तावेज नहीं है और कोई भी अपने नाम के दस्तावेज देने को तैय्यार नहीं है।

फेंकू पांडे कुछ कहते की उससे पहले पीए ने कह दिया की हमने सभी मरे हुए लोगो के नाम से पट्टा करवा लिए है तो अब मुर्दे भी हमारी मदत नहीं करेंगे। फेंकू पांडे का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज दौड़ा और उन्होंने ने झट से एक उपाय आ गया उन्होंने पीए से कहा की श्री हनुमान के नाम से जमीन का पट्टा करा दो। और वो तो जीवित भी है, साथ ही साथ कभी जमीन पर अपना दावा ठोकने नहीं आएंगे। पीए ने कहा परन्तु हमारे पास श्री हनुमान के दस्तावेज नहीं है। फेंकू पांडे ने मुस्कुराते हुए कहा की अपनी राम लीला में जो हनुमान को किरदार करता है उसको ले जाओ और आधार कार्ड बनवा लाओ।

फेंकू पांडे का पीए भी बहुत होशियार था प्रधान साहब के यहाँ से एक लेटर हनुमानजी की जन्मतिथि के साथ लेजाकर उसे नोटरी करवाकर हनुमानजी का आधार कार्ड बनवा दिया। अब हमारी पुरानी बस्ती में कई बिगहा बेनामी जमीन हनुमान जी के नाम से है जो किसी को नहीं पता और दूसरी तरफ फेंकू पांडे ने अपने बेटे पप्पू पांडे को आधार कार्ड दिखाकर कहा की हनुमानजी अमर है इस बात का प्रमाण ये आधार कार्ड है।
यदि भविष्य में आपको बाकि के ६ अमर लोगो के नाम का पैन कार्ड और आधार कार्ड या वोटर कार्ड दिख जाए तो ताज्जुब मत करना। हनुमान जी भी अपना आधार कार्ड और इंसान की काली करतूतो को देखकर मुसकरा रहे है और एक दिन बहीखाता लेकर आपके सामने उपस्थित होंगे।

जय हनुमान जी की !

अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ। अपनी पुरानी बस्ती में आते रहना।

टिप्पणियाँ

  1. हनुमान जी की भी जय और भक्तों की भी. किन्तु ये भक्त तो लाजवाब निकला. प्रभु के अमरत्व का प्रमाण का उत्तम जुगाड़.. आज भी मंदिर जाता हु तो भगवान् बोलते हैं-- भक्त तो वो हैं जिसने पहचान दिलाई और पेंशन का जुगाड़ कर दिया, आप तो बस प्रसाद लाते हो!

    Tweet: @piyushKAVIRAJ

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