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घोटाला - श्री हरी

घोटाला भारतवासियों के लिए कोई नई बात नहीं है। घोटाला तो हमारी पौराणिक कथाओ मे भी दिखता है । जब घोटाला बढ़ने लगता है तब भगवान श्री हरी विष्णु इस धरती पे अवतार लेते है । और घोटाला करने वालो का विनाश करते है । कभी - कभी भगवान ने स्वयं घोटाला करने के लिए धरती पे जन्म लिया। घोटालो से हमारा नाता बहुत पुराना है क्योंकि भगवान श्री हरी विष्णु ने कई बार इस धरती पे घोटाले किये । 

विष्णु के द्वारा किये घोटालो की सूचि इस प्रकार है। वामन रूप मे श्री हरी विष्णु ने दो कदम में पुरे जगत का दान ले लिया । मोहिनी का रूप धारण करके उन्होंने भस्मासुर का वध किया । सागर मंथन के बाद जब राहू ने चुपके से देव रूप धरकर अमृत पान किया तो विष्णु ने उसके अंग को दो भाग मे विभाजीत कर दिया । भगवान कृष्ण के अवतार मे तो श्री हरी विष्णु ने सभी घोटालो की मर्यादा तोड़ दी । परंतु भगवान ने हर एक घोटाला समाज कल्याण के लिए किया था। भगवान ने हर एक घोटाला न्याय स्थापना के लिए किया था। 

जब मै श्री हरी विष्णु के घोटालो की बात करता हू तब हमें इस बात पे विशेष ध्यान देना चाहिए की श्री हरी ने सभी घोटाले मानव जाती की भलाई के लिए किये​ ​परन्तु श्री हरी​ ​के हर घोटाले से असुरो का संहार किया, इस लिए मानव इन घोटालो को श्री हरी का चमत्कार मानते है परन्तु असुर इसे धोका मानते है । एक बात गौर करने योग्य है की समय के साथ श्री हरी के घोटाले बदलते चले गए । असुरो ने भी नए नए तरीके निजाद किये परन्तु श्री हरी के घोटालो के आगे असुर मानव जाती का कुछ नहीं बिगड़ पाए ।

समय बदला और समय के साथ साथ असुर बदल गए उनके घोटाले करने के तरीके बदल गए । अब असुर सिर्फ और सिर्फ धन के लिए घोटाला करते है । असुरो के इस घोटालो को नए नए नाम से जाना जाता है उदहारण के लिए बोफोर्स घोटाला, चारा घोटाला, ताबूत घोटाला, २जी घोटाला, सी डब्लू जी घोटाला, अयस्क घोटाला, निर्माण घोटाला और कोयला घोटाला इत्यादी । असुरो के घोटालो को जवाब देने के लिए श्री हरी विष्णु कलगी अवतार मे जन्म लेंगे और ऐसा घोटाला करेंगे जिससे मानव जाती का​ ​उत्थान ​​हो​​गा ।

कलगी अवतार मे अभी समय है क्योंकि असुरो के घोटालो ने अभी सीमा​ ​पार नहीं की है । असुरो के घोटालो को रोकने के लिए श्री हरी के सेवक जन्म लेते रहते है पर उन्हें हर बार कुचल दिया जाता है । कभी सेवक को जला दिया गया, कभी सेवक को गोली मर दी तो कभी उसे गाडी के नीच कुचल दिया । कलयुग मे असुर निरंतर शक्तिमान होता जा रहा है इस लिए श्री हरी जल्द से जल्द इस धरती पर जन्म​ ​लेंगे। तब तक भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) सभी असुरो का बही खाता तैयार कर रहे है ।

आप यदि घोटाला करने से नहीं डरते तो अब से डरना। श्री हरी सभी को न्याय और अन्याय का पाठ फिर से पढ़ाएंगे जिसे मानवजाति ने अपनी जरूरत के हिसाब से बदल दिया है। हो सकता है आप जिसे धर्म समझकर कर रहे है वो अधर्म निकले और फिर आपको आपके पांपो की सजा मिले। जितना पुण्य 
कमा सकते है कमाते रहिए मोक्ष प्राप्ति के लिए पुण्य जरुरी है। स्वर्ग जाने के लिए आसुरी प्रवित्ति वाला कोई भी घोटाला नहीं चलेगा। ……… और भगवान पर भरोसा करिए।

नोट - अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ। 
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टिप्पणियाँ

  1. जबरदस्त लिखा है भाइ
    और टाइमिंग भी ठीक आज ही कोर्ट में तीन घोटालेबाज असुरों के नाम बताये गये हैं ।
    ~@vyang_shastra

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    1. घोटाले बाज असुर हर साल जन्म लेते रहेंगे

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    1. घोटाला करोगे तो किसी दिन तुम्हारा नाश भी होगा

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  3. अच्छा लेख है।पता नहीं आधुनिक युग के असुरों की बुराई की सीमा कहाँ तक है जब कलगी अवतार में श्री हरी की आस लगा बैठे हैं हम।vijaya

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    1. घोटाले के असुरो को मिटाने के लिए मानव को ही प्रयत्न कारन होगा

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  4. आपने बड़ी ही खूबसूरती से देवताओं और असुरों के माध्यम से वर्तमान समय स्थिति को वर्णित किया है । वर्तमान समय में विष्णु जी के अवतार की बहुत ज़रूरत है । आपको बधाई इतनी खूबसूरती से वर्णन करने के लिये ।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद और बेहतरीन लिखने को कोशिश होगी

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  5. आपने बड़ी ही खूबसूरती से देवताओं और असुरों के माध्यम से वर्तमान समय स्थिति को वर्णित किया है । वर्तमान समय में विष्णु जी के अवतार की बहुत ज़रूरत है । आपको बधाई इतनी खूबसूरती से वर्णन करने के लिये ।

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  6. "जितना पुण्य कम सकते है कमाते रहिए मोक्ष प्राप्ति के लिए पुण्य जरुरी है। स्वर्ग जाने के लिए आसुरी प्रवित्ति वाला कोई भी घोटाला नहीं चलेगा।"
    पर इस पृथ्वीलोक में बिना धन के स्वर्ग कहां है ... और बिना घोटाले के धन, पुण्य और मोक्ष कैसा !!! ;))

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  7. समय व परिस्थितियों के अनुकूल लिखा है आपने...शुभकामनायें...!!!

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  8. सही कनेक्ट मारा है घोटाले का ! मज़ा आया पढ़ के, भारत से घोटाले अब शायद ही ख़तम होंगे आप लिखते रहिये अपने शब्द भी कहाँ कम है !!

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  9. प्राचीन घोटालों का इतिहास बताते हुए उसे वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ा है। एक अच्छी समसामयिक रचना! शुभकामनाएँ!

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    1. धन्यवाद हर बार कुछ बेहतरीन करने की कोशिश रहती है

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  10. प्राचीन घोटालों का इतिहास बताते हुए वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ा है।एक अच्छी समसामयिक रचना! शुभकामनाएँ!

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  11. मेरे समझ से ये कलयुग है और इसका युगधर्म है , चोरी, मक्कारी , घोटाला और वही हो रहा है आप इस से बच नही सकते.कलयुग में रह कर सतयुग का युगधर्म का पालन नही हो सकता.आपका निबंध स्राहनिए है.

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    1. जी यदि आप कोशिश करे तो कुछ भी असंभव नहीं है

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  12. गागर में सागर भरने का कार्य किया है आपने। जो समझे उनके लिये अनंत प्रेरणा का स्त्रोत है ये लेख इसी तरह आप अपना धर्म निभाते जाये जगाने का! साधुवाद !

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    1. हमेशा कुछ लिखकर लोगो को जगाने की कोशिश रहती है

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  13. अतीत को वर्तमान से काफ़ी बेहतरीन तरीके से जोड़ा है। बढ़िया। बधाई।

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    1. धन्यवाद, व्यंग्य में जोड़ना और लोगो का समझना ही सबसे कठिन है

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  14. Very nice.. Ghotala na ho kya ye mumkin hai ??!! Khair asha to ki ja sakati hai

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    1. घोटाला रोकने के लिए हमें अपने आप को मजबूत करना होगा

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  15. बहुत अच्छा लिखा है सर आपने … सकरात्मत सोच के साथ …

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  16. भाई बहुत खूब! बधाई हो! घोटाला और तारणहार के बीच सही समन्वय बनाया आपने. कलियुग तो आ चुका, कलगी का इंतज़ार है!
    Tweet: @piyushKAVIRAJ

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  17. अनुभव और शब्दों पर कसावट साफ झलक रही है।।।।।।।।।बेहतरीन।।।।।।।।।

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    1. इतनी शुद्ध तो मैंने कहानी नहीं लिखी जितनी शुद्ध आपने प्रतिक्रिया दे दी

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  18. उत्तर
    1. बढ़िया, हर घोटाले बाज यही कहता है की वो घोटाला नहीं करता

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