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घटती गरीबी

उतपात प्रदेश के मुख्यमंत्री पिछले कई दिनों से चिंतित लग रहे थे। पांच साल की सत्ता में तीन साल निकल गए थे लेकिन अभी तक अगले चुनाव में वोट मांगने वाला कोई काम नहीं कर पाए थे। उतपात प्रदेश में गरीबी बढ़ती जा रही थी। बेरोजगारी का आलम ये था की हर चौराहे पर चार इंजीनियर बीड़ी जलाकर सुबह से शाम तक मुख्यमंत्री साहब को कोसते थे। यदि कोई खुश था तो वो थे मुख्यमंत्री साहब के मिनिस्टर और बाबू लोग जो मुख्यमंत्री साहब के शपथ लेने के दिन से हर सेकंड १ हजार रुपए से लेकर १ लाख रुपए तक की तरक्की कर रहे थे। मुख्यमंत्री साहब को बात ज्ञात हो गई थे की यदि ऐसा चलता रहा तो अगले चुनावो में हार तय है। 

मुख्यमंत्री साहब को अगले महीने वर्ल्ड बैंक के पास लोन लेने जाना था। कपड़े लत्ते सिला लिए गए, मुख्यमंत्री साहब की धर्मपत्नी ने एक लिस्ट तैयार कर दी की उन्हें विदेश से क्या क्या सामान चाहिए। मुख्यमंत्री साहब की धर्मपत्नी भी साथ जाना चाहती थी, पिछले ३ महीने से विदेश नहीं गई थी परन्तु मुख्यमंत्री साहब ने ये कहकर मना कर दिया की मीडिया वाले ऐसे ही जान के दुश्मन है और यदि तुम्हे साथ देखेंगे तो और एक बवाल खड़ा कर देंगे। दोनों हाथों से कान पकड़कर मुर्गा बनकर अपनी धर्मपत्नी से क्षमा मांगी और कहा की अगले टूर में उन्हें साथ अवश्य ले जाएंगे। धर्मपत्नी जी जैसे तैसे मान गई और मुख्यमंत्री साहब विदेश चले गए। 

वर्ल्ड बैंक के दफ्तर में मुख्यमंत्री साहब ने और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी देखा और मन ही मन कहने लगे की ये नामुराद यहाँ भी भीख मांगने पहुंच गए। ३ घंटे इंतज़ार करने के बाद नेताजी का नंबर आया, नेताजी को तो ज्यादा ज्ञान नहीं था लेकिन उनके साथ एक एमबीए गया था वो कंप्यूटर खोलकर ज्ञान बांटने लगा उतपात प्रदेश की गरीबी और भुखमरी को इतने बढ़िया और संवेंदना पूर्ण बैक ग्राउंड म्यूजिक के साथ दिखाया की हमारे न्यूज़ चैनल वाले पीछे रह जाए। वर्ल्ड बैंक वाले लोन देने को तो तैयार हो गए लेकिन उन्होंने कहा की आपको को पहली क़िस्त से सबसे पहले लोगो की गरीबी कम करनी होगी, दूसरी क़िस्त का भुगतान उसके बाद ही होगा। 

नेताजी जिस विमान से वापस आ रहे थे उस विमान में अन्य राज्यों की मुख्यमंत्री भी मिल गए।  नेताजी को उनके चेले ने बताया की अन्य राज्यों को भी गरीबी कम करने पर ही लोन मिलेगा। सभी मुख्यमंत्री आपस में गुप्तगू करने लगे की यदि गरीबी कम हो गई तो हमें वोट कौन देगा और हमारी आने वाली पीढ़िया किस मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगी। लेकिन दूसरी तरफ वर्ल्ड बैंक की तलवार लटक रही थी। सभी मुख्यमंत्रियों ने मिलकर एक प्लान बनाया और सर्व सहमति से उस प्लान को विधानसभा में पास करवा दिया। देखते ही देखते ६ महीनों में गरीबी काम हो गई। वर्ल्ड बैंक से बाकि किस्तें भी आ गई। मुख्यमंत्री साहब ठाठ से अपनी धर्मपत्नी के साथ विदेश घूमने गए। 

उतपात प्रदेश में गरीबी के हालत आज भी वही है। चौराहे पे खड़े इंजीनियर अभी भी बीड़ी जलाकर दिन रात मुख्यमंत्री साहब को कोसते रहते है। लेकिन चुनावो में मुख्यमंत्री साहब ने वर्ल्ड बैंक के पैसो का जमकर लाभ उठाया और फिर से चुनाव जीतकर सरकार बना ली। मुख्यमंत्री साहब के मिनिस्टर और बाबू लोग अब हर सेकंड १० हजार रुपए से लेकर १० लाख रुपए तक की तरक्की कर रहे थे। मुख्यमंत्री साहब भी लोगो से गरीबी कम करने पर खूब वाह - वाही बटोर रहे थे। उतपात प्रदेश अभी भी बेहाल पड़ा था और अपनी किस्मत को कोस रहा था और गरीबी ख़त्म होने का इन्तजार कर रहा था। मुख्यमंत्री साहब चैन की नींद सो रहे थे और आज कल कान पकड़ कर मुर्गा भी नहीं बनना पड़ता था। 

६ महीने पहले वर्ल्ड बैंक की मीटिंग से आने के बाद 

सभी राज्य की मुख्यमंत्री जब गरीबी कम करने की बात को लेकर चिंतित थे तभी उतपात प्रदेश के मुख्यमंत्री के चेले (MBA) ने एक सुझाव दिया। उसने बताया की जो व्यक्ति प्रतिदिन २५ रुपये से कम कमाता है वो गरीब कहलाता है तो आप सब राज्यों की मुख्यमंत्री एक प्रस्ताव पारित करके गरीबी रेखा को १२ रुपये पर ले आए और सभी मुख्यमंत्रियों ने ठीक ऐसा ही किया और गरीबी रेखा को ९ रुपए पर ला दिया और इस तरह उतपात प्रदेश के सभी गरीब रातो रात गरीबी रेखा से ऊपर उठ गए। कई सरकारी तरक्कियो में इस तरह के पैमाने रोज गढ़े जाते है और गरीबो को रातो रात अमीर बना दिया जाता है।  

नोट - अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ। 


39 टिप्‍पणियां:

  1. अभी तक का सबसे मस्त तो यही था भाई... साला सच्चाई पढ़ के हँसी आ रही है

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    1. धन्यवाद डीके, हर बार मस्त ही लिखत हूं, आप को इस बार पसंद आ गयी

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  2. बिलकुल सही कहा भाई। एक दम खरी बात ।
    @shyamaswami

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  3. जे तो लाख टके की बात कही है भाई साहब

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  4. एकदम सटीक लिखा है ! बधाई

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  5. वर्ल्ड बैंक की नियत भी खराब ही है वो लोग भी विकासशील देशो को सिर्फ कर्ज से ही डुबाना चाहते हाउ

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  6. बहुत खूब शायद ये पढ़ कर कुछ लोग शिक्षित हो जाये ।
    शानदार ।

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    1. कोशिश तो यही करते है की लोग कुछ सोचे और बदलाव करे

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  7. bahut khub likha hai..
    sabhi apna kaam bakhubi nibha rahe hai....neta ji ko paisa kamane se fursat nahi aur janta ko kosne se fursat nahi ....

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    1. सही कहा कोई भी अपने भले के अलावा कुछ नहीं करना चाहता है

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  8. आपका लेख पढ़कर एक बात याद आ गयी जो मैं अक्सर खुद से भी कहती हूँ ताकि खुद को सही रख सकूँ किसी भी सामाजिक व राजनीतिक मसले पे निष्पक्ष रख सकूँ और वो ये कि जिसको जो समझना है समझे हम तो सच ही बोलेंगे भईया तो बेहतरीन लेख। बाकी मंतरी जी ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि कोई प्रश्न नहीं पूछेगा और हमने फिर भी एक प्रश्न लटका ही दिया है कि प्रदेश का नाम उत्तर प्रदेश और मंतरी जी कहते हैं कोई प्रश्न नहीं पूछेगा तो ये भी कोई बात हुयी भला ?

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  9. वास्तविक चित्रण किया है आपने शब्दों के माध्यम से वर्तमान स्थिति का। यही हो रहा है। राजनैतिक उद्देश्य केवल अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु मात्र हैं। अमीर और अमीर व गरीब और गरीब होता जा रहा है। शुभकामनायें उत्कृष्ट रचना के लिए।
    -ज्योत्सना खत्री

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  10. बहुत खूब आपने सच्चाई पेश की है /

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  11. अच्छा लिखा हैं; नाम उतपात प्रदेश बढ़िया सुझाया हैं और हाँ बीड़ी की जगह सिगरेट लिखकर कुछ तो इज्जत रख लेते हम इंजीनियरो की ( त्यागी )

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    1. इंजीनियर अपनी इज्जत खुद नहीं कर रहे है और समाज से इक्षा है

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  12. दुखद परिस्थियों को बहुत हलके ढंग से समझाने का प्रयास सराहनीय!

    हमें भी अपने दोषो को विवशता का नाम नही देना चाहिये।

    नेता, मंत्री और अफसर के साथ मुझे भी जिम्मेदार होना पड़ेगा तभी द्रश्य परिवर्तित होगा !

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    1. सही कहा, हम सब को जिम्मेदार होना पड़ेगा

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  13. Bhai, very well written. A perfect example of black humour. Garibi hatao k chakkar me salaa garibon ko hi hata diya. Bahut oonda. Keep up the good work.

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    1. सही कहा, नेता बेशरम है लेकिन हमारे बीच से ही नेता आता है इसे न भूले

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  15. खरच फार छान लिहिले आहे. कीप ईट अप .

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  16. हाहाहा बहुत ही अच्छा लिखे हो भईया।
    वो भी हमारे प्रदेश के बारे में (उत्पात प्रदेश)

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