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एक सुरों भरी शाम - Max Life Insurance iGenius Young Singing Star

पेशावर हादसे के दूसरे दिन ही संगीत समारोह में जाने का मन तो नहीं कर रहा था लेकिन जेहन में घूमते मासूम बच्चो की चीखो से दूर जाने के लिए एक रास्ता दिख रहा था। जब कभी आपको कोई बात अंदर ही अंदर कोंधते रहती है तो आप चाहे लाख जतन कर ले लेकिन आप अपने आप से भाग नहीं सकते है। कस्तूरी और हिरण की कहानी जैसा ही अपना मन है। आप मन की शांति को हमेशा बाहरी चीजो में पाने की कोशिश करते है लेकिन जब तक आप मन को नहीं मनाते आप को कोई शांति नहीं मिलती है। 

क्रिसमस करीब है ये आपको बांद्रा के दुकानो पर बिकती चमिकीली लड़ियों से पता चल जाएगा। जैसे तैसे ट्रैफिक को चीरता हुआ मैं हॉटेल ताज लैंड्स एंड पंहुचा। सलीम मर्चंट कुछ बच्चो को गाने के हुनर सीखा रहे थे। शो के आरंभ होते ही पेशवर में हुए हादसे के लिए दो मिनट का मौन रक्खा गया और उसके बाद सलीम की आवाज में मौला अली अली ने जैसे शमा बांध दिया, मैं भी अपने मन की दुखित भवनाओं से कुछ कुछ बाहर आ रहा था। लेकिन मन में कुछ उलझने गोता लगा रही थी। 

बच्चों ने जैसे ही गाना शुरू किया तो ऐसा लगा की मानो स्वयं राग देवता आज धरती पर उतर आये है। बच्चो की मीठे बोल ने कुछ कुछ मन को शांत कर दिया। हर शो के अंत में एक विजेता होता है तो Max Life Insurance iGenius Young Singing Star के अंत में भी विजेताओ की घोषणा हो गई। मेरे नजरिये से देखेंगे तो हर एक बच्चा आपको विजेता दिखेगा। सबकी आवाज ने मेरे मन को मुझसे लड़ने की और विजय प्राप्त करने की प्रेरणा दी।  मैं तहे दिल से Max Life Insurance और ब्लॉगअड्डा को मुझे इस कार्यक्रम में सहभागी बनाने के लिए धन्यवाद देता हूं। कार्यक्रम से निकलने के बाद घर जाते जाते एक कविता लिखी उन मासूम बच्चो की याद में जो जल्द ही आपके सामने पेश करूँगा, अभी फिलहाल उसकी कुछ पंक्तिया आपके लिए छोड़े जाता हूँ । 


"​
क्या पाया तुमने,
ए कत्ले आम करके,
वो कपड़े के बने नन्हे जूते
बच्चों के लहू से लथपथ,
मरने के बाद तुम
उन कपड़ों जितना
कफन नही पाओगेI"

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