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#कविता - वो रास्ता


बच्चे के  पैदा होने से लेकर स्वयं की मृत्यु तक माँ हमेशा आपके साथ रहती है। माँ के इस प्यार को कुछ पंक्तियों में व्यक्त कर रहा हूँ। 


चलते जाता हूं,
​उसकी बाहें थामे,
वो थकता नहीं,
मैं रुकता नहीं हूं,
बचपन से साथ हूं,
बदले है रंग कई,
उसने और मैने,
​अकसर तन्हाई में
हम साथ होते है,
वो पत्तो से लदा हुआ,
कभी धुप में,
जलता हुआ,
बरसात में न चाहे,
भीगता हुआ,
वो रास्ता,
जो मेरे
घर से निकल कर,
दूर जंगलो में 
जाता है,
वो आज भी
तन्हाई में
मेरा साथ निभाता है,

उससे बचपन की
कितनी यादे है जुड़ी,
मेरे पैदा होने पर
वो मिटटी का था,
वो मुझको पटकता,
मैं उसे पटकता था,
अक्सर आप धापी
में हम दोनों लाल पीले
हो जाते थे,
एक बार जोर से
पटक दिया था
मैंने उसे,
कुछ खरोंचे 
आई मुझे,
उसकी भी
कलाई छिल 
गयी थी,
दोनों मिलकर
साथ चीखे थे,
वो रास्ता,
जो मेरे
घर से निकल कर,
दूर जंगलो में 
जाता है,
वो आज भी
तन्हाई में
मेरा साथ निभाता है,

मेरे साथ वो भी
कपड़े बदलने लगा,
लाल से पीला,
पीले से ईंटे का,
ईंटे से पत्थर का,
पत्थर से डामर का
हो गया,
बदलते समय के
साथ मैं और रास्ता
बदल गया,
लेकिन
लेकिन
हम आज भी 
साथ चलते है,
वो रास्ता,
जो मेरे
घर से निकल कर,
दूर जंगलो में 
जाता है,
वो आज भी
तन्हाई में
मेरा साथ निभाता है,

इस बार जब 
उससे मिलने गया,
तो बड़ा दुखी था वो,
कहता है
पुरानी डामर सूखती
नहीं,
ये नई उड़ेल देते,
तेरी सुर्ख यादो को,
खनकर
कही ढकेल देते है,
वो रास्ता,
जो मेरे
घर से निकल कर,
दूर जंगलो में 
जाता है,
वो आज भी
तन्हाई में
मेरा साथ निभाता है,

इस कविता का अर्थ समझने के लिए रास्ता की जगह मां जोड़ देना :)
अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ। अपनी पुरानी बस्ती में आते रहना। इस रचना पर आपकी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में लिखना न भूले। 


टिप्पणियाँ

  1. उत्तर
    1. धन्यवाद - कोशिश करते रहेंगे कुछ बेहतरीन लिखने की

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  2. कास तुम भी हो जाओ
    तुम्हारी यादो की तरह

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  3. मै तो सोच रहा था की ये रास्ता किसी सुहानी जगह ले जाएगा :) लेकिन अंत कभी कभी सुखों से भरा नहीं होता फिर भी संतुष्टि भरा हो सकता है... आजकल समय इतना तेज़ी से बदल रहा है की जिस काम को हम अपने या दूसरों के लिए करते हैं वो ख़त्म होते होते संतुष्टि की परिभाषा में भी ठीक से बैठ नहीं पाता

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  4. वाह! निर्जीवता का सजीव वर्णन किया है आपने। ऐसी सृजनात्मकता विरले ही होती है। भावात्मक रिश्ता उस रास्ते के साथ स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। शुभकामनायें।

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    1. धन्यवाद - कोशिश करने ऐसे कुछ और पल आपके सामने लेकर आये

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  5. अपने भावो को बहुत सुंदरता से तराश कर अमूल्य रचना का रूप दिया है.

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  6. बेहद खूबसूरत। इस कविता का अर्थ वो ज्यादा करीब से समझ सकता है जो किन्हीं कारणों को बचपन मे मां का स्नेह नहीं पा सका.....

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    1. सही कहा और उम्मीद करूँगा की लोग ऐसा दिन नहीं देखे

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  7. कमाल है भाई, कविता तो बेहतरीन है ही पर आखिर पंक्ति में जो मोड़ दिया है अपने ....."रास्ते की जगह माँ कर देना".....उसने आपकी इस कविता को अमर कर दिया....समझ नहीं आ रहा किन शब्दों में तारीफ करूँ आपकी _/\_

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  8. उत्तर
    1. बात तो आपकी सही है लेकिन अक्सर ऐसा संभव नहीं होता है

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