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​शिरीन दलवी​​ के साथ? - #StandWithShireenDalvi

भारत एक सेक्युलर देश है। यहाँ सेक्युलरता की परिभाषा कुछ जमीन पर कदम न रखने वालो ने बनाई है। इनमे से कई लोग ऐसे है जिन्हे शायद अपने गाड़ी चलाने वाले चालक का उपनाम नाम भी नहीं पता होगा परंतु वो गरीब - झुग्गी में रहने वाले व्यक्ति के विकास का रोडमैप तैयार करते है। भारत में हर मुसलमान उसके जन्म से ही सेक्युलर होता है। उदारहण के लिए अपने ओवैसी भाई कितना भी भाषण धर्म के नाम पर धर्म के खिलाफ दे ले वो हमेशा सेक्युलर ही रहेंगे। परंतु मेरे जैसा हिंदू यदि रोज सुबह उठकर जय श्री राम का जाप करता है तो मैं हिंदूवादी हूँ परंतु मैं सेक्युलर नहीं हो सकता। मीडिया में कई बड़े नाम ऐसे है जो सिर्फ पिछली पंक्ति को ही सही मानते है।


सेलेक्टिव एप्रोच - पीके फिल्म के ऊपर उठे विवाद पर जो तबका फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का रोना रो रहा था उस तबके ने बाबा राम रहीम की फिल्म को ना पास किये जाने पर एक झूठा आंसू भी नहीं बहाया। ओवैसी ने अपने एक भाषण में कहा की कोई कहता है राम अयोध्या में पैदा हुए थे तो कोई कहता उनकी माँ कौशल्या हरियाणा के किसी गांव की थी तो बताओ राम का जन्म कहा कहा हुआ था। इस बात पर भाषण सुन रही भीड़ ने खूब जमकर तालिया बजाई
। ये वही भीड़ है जो शार्ली एब्डो के कार्टून को गलत बता रही थी और हाथ में "हम तुम्हे श्राप देते है" का बैनर लेकर घूम रही थी। आप दुसरो के धर्म के ऊपर हँसो तो वो सही है परंतु आप के धर्म का मजाक नहीं बनना चाहिए। परंतु आप सेक्युलर है आप को ये विशेष अधिकार दिया गया है। 

मुंबई मिरर की खबर के हिसाब से शिरीन दलवी ने शार्ली एब्डो में छपे मुहम्मद के उस कार्टून को अपने उर्दू पेपर अवध नामा में छापा जिसमे पैगंबर मोहम्मद को 'मैं शार्ली एब्डो हूँ' की तख्ती पकड़े हुए दिखाया गया था और कैरीकेचर के ऊपर लिखा हुआ था, "सभी को क्षमा." उस कार्टून से भी कुछ लोग आहत हो गए और 
शिरीन दलवी पर FIR फाइल कर दिया। जबकि अवध नामा के उस अंक के प्रकाशन के दूसरे ही दिन शिरीन दलवी ने मोहम्मद के कार्टून को छापने के लिए क्षमा मांग लिया था (जिसकी कोई जरूरत नहीं थी) । लेकिन जैसा मैंने पहले ही कहा की हमारे यहाँ सेक्युलर का मतलब ही सेलेक्टिव एप्रोच है तो हिंदू धर्म के कार्टूनों पर तालिया बजाने वाले इस्लाम के कार्टूनों को मुसलमानो की भावनाएं आहत करने के दोषी पा जाते है। 

मीडिया में भी धीरे - धीरे एक तबका उभर रहा है जो इस सेलक्टिवे एप्रोच के खिलाफ है और शायद सेक्युलर इस शब्द का सही और नई परिभाषा को भी गढ़ दे। तब तक आप सब से निवेदन करूँगा की शिरीन दलवी के बचाव में आगे आये और फ्रीडम ऑफ़ स्पीच और एक्सप्रेशन को समर्थन दे। 

जय हिंद 

3 टिप्‍पणियां:

  1. लोग 'सेकुलरिज्म' का बुर्का सिर्फ अपने और अपने फायदे के लिए पहनते है।

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  2. बहुत सुन्दर .सेकुलरिज्म के मायने सभी अपने-अपने ढंग से लगाते हैं.
    नई पोस्ट : ओऽम नमः सिद्धम

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  3. secular...iska matlab indian constitution me "sabhi dharmon ka samman aur acceptance se zyada kisi bhi dharm ka apmaan aur rejection na krna" hai.
    pr ye thekedaar aur unke sandeshwahak(media) apne hisaab se nyi paribhasha banate hai jo unka maksad pura krne me madadhar sabit ho sake...

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