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#कविता - क्या होगी पेड़ों की जात

क्या होगी पेड़ों की जात,
कभी सोचा है आपने,
सवाल अटपटा है,
लेकिन क्यों नही बांटा
उसे हमने जात-पात में,

चलो एक एक करके,बांटते हैं पेड़ों को,
फल वाले पेड़ और फूल वाले पेड़,
बड़ी-बड़ी भुजाओं वाले,
छोटी-छोटी टहनीयों वाले पेड़,

वो आम का पेड़,
जो हवन में जलता हैं,
बाभन होगा,
क्योंकि उसके पत्तों की पूजा भी होती हैं,
फल भी खुब रसीला मंत्रो की तरह,

बबूल का पेड़ छाया नही देता,
उसके कांटें चुभ जाए तो दर्द होता है,
और खुन निकलता है,

लेकिन बड़ा मजबूत होता है,
बबूल शायद ठाकुर होगा,

बनिया तो महुआ होगा,
उसके पत्तों से पत्तल बनती हैं,
रसीले फल आंटे में
मीजकर गुजीया बनाते हैं,
सुखाकर उसके फल दुकान पर बेच देते हैं,
तेल भी मिलता है महुए की कोईय्या से,
लकड़ी तो उसकी बड़े काम आती हैं,

कुछ पेड़ है,
जो जल्दी जल्दी बढ़ते है,
उनकी लकड़ी जलावन बनती हैं,
अमलतास मेरा हरिजन होगा,
बस बढ़ता है और कटता है,
उसके कटने पर किसी को दु:ख नही होता,

सवाल मेरा पढ़कर,
सोचोगे तुम, 
पागल हो गया बस्ती,
बहकी-बहकी सी बातें करता है,
तो क्यो नही सोचते,
इंसानो को जात-पात में बांटने पर,


चलो एक एक करके,

बांटते हैं पेड़ों को,

"जो बाजार चहकता था हर शाम" इस कविता को भी एक जरूर पढ़े

धन्यवाद
@पुरानीबस्ती


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अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ।  आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए भारतरत्न है तो जरूर देना।

60 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. धन्यवाद, कोशिश रहेगी आगे और बेहतरीन लिखने की कोशिश करें

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  2. बहुत ही बढ़िया, ये जात पात करने वालों को करारा जवाब.... और हाँ भाई बहुत ही खूबसूरत व्याख्या की है कि कोई पेड़ इस जाति का क्यों होना चाहिए..... मज़ा आ गया पढ़कर :-))

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  3. आपको ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

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    उत्तर
    1. धन्यवाद, वैसे मैंने भारतरत्न की मांग की है

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  4. वाह...भाई...बहुत खुबसूरत....एक-एक पंक्ति में अनुभव साफ़ झलकता हुआ.........

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  5. बहुत ही उम्दा रचना। आपने सभी पेड़ों का बेहतरीन विश्लेषण किया है।

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  6. उत्तर
    1. एक मोहतरमा कह गई की चंदन का पेड़ महिला होगा सिर्फ देने में विश्वास रखता है

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  7. बहुत खूब रचना !

    इंसानो ने आज तक उसी को उंच-नीच और जात-पात में बांटा है जिसने कभी अपने हक़ की मांग की है न की उसे जो केवल देने वालें है! पेड़ बच गए क्यूंकि वो केवल देना जानते हैं और बेजुबान हैं !

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    1. सही बात कही आपने - उम्मीद है एक दिन ये सब मिट जायेगा

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  8. समाज के रूपक में रचना की संभावनाएं तलाश कर के उन्हें रूढ़िवादी सोच के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने की ये कला वाकई सराहनिय है। बढ़िया !

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    1. धन्यवाद, कोशिश रहेगी आगे और बेहतरीन लिखने की कोशिश करें

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  9. जाति व्यवस्था पर बढ़िया कटाक्ष।

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  10. waah!kaafi achha.din-ba-din aap aur achha likhte jaa rahe hai.yeh kavita vakayi kafi achhi hai.

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    1. धन्यवाद, पुरानी बस्ती में आते रहिये

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  11. आप अच्छा लिखते हैं, यह कविता भारत के परिदृश्य में सही बैठती है।
    हिंदी दिवस भी निकट है, और लिखते रहें :-)

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  12. bhut pyari kavita h.. muje ye soch achilagi or sochne ka tarika ki insaan ko jaat-paat me bata ja sakta h lekin kudrat ko nhi....

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  13. tag karne ke liye dhanywaad....aapki kavita ka bhavarth aspast hai.. kintuu apne sabdkhosh se kuch acche sabdo ka prayog kare to uttam hoga...

    aapko bharat ratn diya jata hai...

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  14. पेडों की जातियां, बहुत खुब बनाई आपने...लेकिन काश ऐसी जातियां न बनें क्योंकि इंसानों की जातियों के दुष्परिणाम हम देख चुके है। कम से कम पेड तो चैन से रहें।

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  15. बहोत सुंदर ब्लॉग है आपका। डिझाइन और कल्पना बहोत सुंदर है और लेखन भी।
    धन्यवाद।

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    1. धन्यवाद, कोशिश रहेगी आगे और बेहतरीन लिखने की

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  16. बहुत कमाल की सोच के साथ लिखी हुई कविता .... बहुत बधाई .... कवि का नाम क्या पुरानी बस्ती है =D

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    1. https://www.youtube.com/watch?v=vP2a6WWYXJI बिलकुल नही, पूरी जानकारी नाम के साथ

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  17. बहुत कमाल की सोच के साथ लिखी हुई कविता .... बहुत बधाई .... कवि का नाम क्या पुरानी बस्ती है =D

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    1. जी नाम बताने पर आप भी मेरी जात पता करने लग जायेंगे

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  18. बहुत कमाल की सोच के साथ लिखी हुई कविता .... बहुत बधाई .... कवि का नाम क्या पुरानी बस्ती है =D

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  19. बहुत कमाल की सोच के साथ लिखी हुई कविता .... बहुत बधाई .... कवि का नाम क्या पुरानी बस्ती है =D

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  20. उत्तर
    1. धन्यवाद, कोशिश रहेगी आगे और बेहतरीन लिखने की

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