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#व्यंग्य - चेतन भगत लेखक है ?

प्यारे चेतन भगत कल आप ने ट्विटर पर शिकायत दर्ज की, "जिन लोगो ने कभी बेस्ट सेलर नही लिखी वो सालो से आपकी लेखनी को जज कर रहें हैं और अब वो इस बात से और चौक गए है की कैसे आप एक डांस शो जज कर सकते हो?" सबसे पहले मैं बेस्ट सेलर वाली बात का जवाब देना चाहूँगा कि प्रायः जिन फिल्म आलोचकों के ४ स्टार और ५ स्टार देने से आप खुश हो जाते है उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी एक यूट्यूब वीडियो भी नही बनाया लेकिन फिर भी फिल्मो पर आलोचना देकर पैसे कमा रहे हैं तो आप की किताब की आलोचना करने के लिए जरुरी नहीं की हम सभी को बेस्ट सेलर लिखना होगा या फिर कम से कम एक किताब लिखने के बाद ही आलोचना करना होगा। बात आपकी हो रही है इसलिए मुद्दे से भटकना नहीं चाहता अन्यथा ऐसे बहुत से उदाहरण है जो पैसा कमाने के मामले बेस्ट सेलर है परंतु आलोचना उनकी बहुत ही दमदार तरीके से होती है। 

चलिए अब मेरी बात करते हैं - मैं बचपन से पढ़ाई लिखाई में बहुत होशियार नहीं था लेकिन गदहा भी नहीं था। क्लास में प्रथम स्थान तो नहीं आता था लेकिन क्लास में टॉप टेन में रहता था। आप जैसा कोई रहा होगा जो दिन रात पढ़कर पहला स्थान प्राप्त करता था और हम सभी काम अंकवाले बच्चो को अपने पिताजी से डांट खिलवाता था। धीरे-धीरे स्कूल की पढ़ाई पूरी हुई तो हम कॉलेज में आ गए। पिताजी ने कहा बेटा तुम्हे इंजीनियर बनना है। पिताजी जी की नानी के मायके में उनके भाई के पोते ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद उसे अच्छी नौैकरी मिल गई और वो अमरीका शिफ्ट हो गया। उसके साथ उसका पूरा परिवार भी वाही चला गया और पिताजी की भी मेरे से यही उम्मीद थी। 

IIT की पढ़ाई की तैयारी में दिन रात लग गया। कभी कभी तो माहौल एक दम थ्री इडियट फिल्म के किरदार फरहान कुरैशी जैसा होता था। रात को पढ़ते समय गर्मी ना लगे इसलिए पिताजी ने मेरे कमरे में AC लगवाया।  कहानी एक दम फ़िल्मी है लेकिन फिर IIT के नतीजों में मेरा नाम ठंडी के मौसम के गिरते हुए तापमान की तरह कही विलुप्त हो गया। पिताजी ने कहा कोई बात नहीं फिर से कोशिश कर इस बार IIT में दाखला मिल जायेगा। लेकिन दूसरे साल के नतीजों में भी मेरा नाम कही नहीं था। फूफाजी और माँ चाहते थे की मैं एक बार और कोशिश करू लेकिन पिताजी ने कहा इंजीनियरिंग ही तो करनी है किसी भी कॉलेज से कर लो मेहनत करोगे तो आगे निकल जाओगे। दूसरी तरफ आप जिसने IIT से इंजीनियरिंग पूरी की !

इंजीनियरिंग की पढ़ाई को जैसे तैसे करके पूरा किया। दोस्तों के साथ पोर्न फिल्मे देखना और गंजे से लेकर अफीम तक का सारा नशा करना। जब भी दोस्तों के साथ नशा करने बैठता इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाने के लिए पिताजी को धन्यवाद देता। मेरे कॉलेज का कोई खास नाम नहीं था इसलिए प्लेसमेंट नहीं मिली और फिर जैसे तैसे पहचान से एक IT कम्पनी में प्रोग्रामिंग का काम करने लगा।  कुछ साल काम करने के बाद लोगो ने कहा की अब MBA कर लो तो ही आगे बढ़ सकते हो। मैंने भी बात मान ली और आईआईएम की तैयारी में जुट गया लेकिन जैसा मेरे साथ हरबार होता था इसबार भी नसीब ने मेरा साथ नहीं दिया और मुझे पुरानीबस्ती इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च (PIMSR) से MBA करना पड़ा। दूसरी तरफ आप जिसने आईआईएम-ए से MBA किया। लेकिन तब तक मैं आप को नहीं जानता था। 

आपने अपनी बैंक की नौकरी को छोड़कर किताब लिखना शुरू कर दिया और मैं दूसरी तरफ MBA के बाद एक कंपनी में नौकरी करने लगा जहाँ सेल्स टारगेट देख देखकर नाक में दम हो जाता था। आपकी किताबे धीरे धीरे बेस्ट सेलर हो गई। तब आपके बारे में पता चला की बंदा IIT से इंजीनियरिंग कर चूका है थोड़ी चिढ़ हुई क्योंकि मैं भी IIT से ही करना चाहता था परंतु नहीं कर पाया और IIM-A वाली बात सुनकर तो मेरा दुःख दूना हो गया। फिर आपकी किताब पढ़ी टू स्टेट्स - आपकी प्रेम कहानी पढ़कर और चिढ़ होने लगी। आपकी जिंदगी देखकर ऐसा लगा की मैंने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ कभी नहीं पाया। धीरे धीरे आप शोहरत के मुकाम हासिल करने लगे और टीवी पर आ गए।

मैंने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद MBA भी किया लेकिन मुझे वो सब नहीं मिला जो आपको मिला। फिर एक दिन घर के एक कोने में रखा गिटार दिखा। पिताजी जी की नानी के मायके में उनके भाई के पोते ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं की होती तो मुझे भी इस झमेले में नहीं कूदना पड़ता और मैं शायद आज किसी बैंड में लीड गिटारिस्ट होता। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और मुझमे हिम्मत भी नहीं की अब सब छोड़कर गिटार की तरफ देखूं और वाही दूसरी तरफ आपने सब कुछ छोड़ छाड़कर अपने सपनो को पर दिया और उसे पूरा किया। बस कुछ कारणों में यही बातें है जिनके बजह से आपके ऊपर चुटकुला बनाकर और आपकी लेखनी का मजाक उड़ाकर दिल को खुश रख लेता हूँ। आपको भी इससे फायदा ही हुआ है आपकी सारी किताबे बाजार में आते ही पहले दिन खरीदता हूँ ताकि उसे पढ़कर मजाक उड़ा सकू और अपने दिल को खुश कर सकू।  आशा करता हूँ की आप मेरी ख़ुशी में विघ्न नहीं डालेंगे और किताबे लिखते रहेंगे। 

आपका प्यार पाठक,
स्टूडंट ऑफ़ PIMSR


पों पों - अगले सोमवार फिर आना बस्ती में, एक नई रचना के साथ आपका स्वागत होगा। 

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टिप्पणियाँ

  1. उत्तर
    1. अक्सर सामन्य बातें लोगो को पसंद ही आती है

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  2. Haha badhiyaa bhai, chetan bhagat ko bhi zaroor bhejiyegaa...!!! :D

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    1. भेज दूंगा और वो टाइटल पढ़कर ब्लॉक मार देंगे

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  3. Umda lekhan hain , jaari rakhiye ... ! Thoda establishment ko bhi jagaye rakhey

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    1. टिप्पणी के लिए धन्यवाद - कोशिश करते रहेंगे

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  4. बहोत बढियां! गहरी और वास्तविक! पर क्या भगत जी को समझ आएगी,आ ही जायेगी!

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  5. गोपाल गिरधानी28 अप्रैल 2015 को 9:26 pm

    आप ने व्यंग्य में एक बात सही कही कि चेतन भगत एक सामान्य लेखक है । उन्हें किस्मत से लोकप्रियता हासिल हुई है ।

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  6. किसी को तो छोड़ दो भाई ! चेतन भगत इसे पढ़ ले तो चिंतन भगत हो जायेगा हाहा

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    1. एक बार उसे पढ़ना चाहिए, आगे से चुटकुले बनाने पर शिकायत नही करेगा

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  7. बहुत खूब ! अपनी राय भी मिलती-जुलती ही है.

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  8. Uski baaton ko bhi aap humour mein he len jaise hum aapki baaton ko lekar prasann ho jaate hain..... :p

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  9. चेतन भगत के चाहने वाले ज़रूर पढ़ें. सुश्री Anjali Sharma ने बयान किया है ये वाकया-
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    'मुंबई में एक समारोह के दौरान चेतन भगत और गुलजार साथ बैठे थे । चेतन को सभी अतिथियों का स्वागत तो करना ही था, समारोह का संचालन भी करना था । चेतन ने अपने अंदाज में ठसक के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की ।
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    अतिथियों का परिचय करवाते हुए बारी गुलजार साहब की आई । यहीं पर चेतन भगत से चूक हो गई । ऑस्कर पुरस्कार विजेता और हिंदी के बेहद प्रतिष्ठित लेखक-गीतकार गुलजार का परिचय करवाते हुए चेतन भगत ने कहा- मुझे कजरारे-कजरारे गीत बेहद पसंद है । गुलजार साहब ने इस गीतो को लिखा है । यह बेहतरीन कविता का एक नमूना है ।
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    जिस तरह से चेतन यह बात कही वो गुलजार साहब को चुभ गई । गुलजार को नजदीक से जानने वाले इस बात को बेहद अच्छी तरह से जानते हैं कि उनकी वाणी विरोधियों के खिलाफ तेजाब उगलती है । शायद चेतन को यह पता नहीं रहा होगा और उसने गीतकार गुलजार पर टिप्पणी कर डाली जो गुलजार को अखर गई ।
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    चेतन बोल ही रहे थे कि उन्होंने इशारा कर माइक अपने पास मंगवाया और बोलने की इच्छा जाहिर की । किसी भी कार्यक्रम में जब गुलजार साहब बोलना चाहें तो किसी की मजाल नहीं कि उन्हें रोक सके । गुलजार ने माइक हाथ में लिया और खचाखच भरे हॉल में बोलना शुरु किया- चेतन मुझे यह
    बात बेहद अच्छी लगी और मैं खुश हूं कि आप जैसे महान लेखक को कजरारे –कजरारे गीत अच्छा लगा । लेकिन मुझे लगता है कि आप जिस कविता की यहां बात कर रहे हैं उसे समझ भी पाए हैं । अगर आपको फिर भी लगता है कि आपने उस कविता को समझा है तो मैं आपके लिए उसकी दो लाइन गाकर सुनाता हूं आप भरे हॉल में उसका अर्थ बता दीजिए ।
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    गुलजार साहब यहीं पर नहीं रुके और उन्होंने कजरारे-कजरारे गीत से दो लाइन गाकर सुना दी – तेरी बातों में किवाम की खुशबू है, तेरा आना भी गर्मियों की लू है ।
    इसके बाद सीधे चेतन की तरफ मुखातिब होकर पूछा कि इसका अर्थ बताइये । अब चेतन को काटो तो खून नहीं । गुलजार जैसा सीनियर लेखक भरी सभा में कविता की दो लाइन का अर्थ पूछ रहा है ।
    गुलजार के वार से सन्न रह गए चेतन बगलें झांकने लगे । चेतन को चुप देखकर भी गुलजार नहीं रुके ।
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    उन्होंने भरी सभा में चेतन को झिड़कना शुरू कर दिया । गुलजार ने कहा – जिस चीज के बारे में
    पता नहीं हो उसके बारे में कुछ भी बोलना उचित नहीं है । जिसके बारे में जानते हो उसी के बारे में बोलो । हाथ में माइक लिए पोडियम पर खडे़ चेतन की स्थिति का अंदाज आप लगा सकते हैं । गुलजार ने चेतन की ठसक और हेकड़ी चंद पलों में हवा कर दी'.

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