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#कविता - अम्माँ

कई बार खरोचता हूँ मेरी बिसरी यादों को,
कुछ धूमिल-धूमिल सी तस्वीरें
पर्दे पर चलती फिल्म सी बढ़ती जाती हैं,
मेरे बचपन के भी क़िस्से रहे होंगे, 
अम्माँ के साथ चले गये,

हम आटें की गोलियां बनाकर खेलते थे,
अम्मा चिड़ीयाँ के आकार की रोटी बनाकर खिलाती थीं,
कभी उसकी नाक बड़ी हो जाती थीं,
कभी टांग बड़ी हो जाती थीं,
मैं तो चिड़ीयाँ की टांग हमेशा तोड़कर खाता था,
वो नून और तेल चपोत के रोटी खिलाती थीं,
मेरे बचपन के भी क़िस्से रहे होंगे, 
अम्माँ के साथ चले गये,

वो जब उपले थाप करती थी,
हम उसमें आँख बनाया करते थे,
कभी दादा जी, कभी नाना जी
की शकल उकेरा करते थे,
वो नेउरा भाई हम पिछवैं हई
कि कहानी हर रात सुना करतें थे,
मेरे बचपन के भी क़िस्से रहे होंगे, 
अम्माँ के साथ चले गये,

याद नहीं ठीक से लेकीन,
बीमार मैं हो गया था जब बचपन में,
और अम्मा ने खाना-पीना छोड़ दिया था,
कभी निहारती मुझे, 
कभी बालों में हाथ फेरती,
गीले पानी की पट्टी रात भर जागकर बदलती थी,
मेरे बचपन के भी क़िस्से रहे होंगे, 
अम्माँ के साथ चले गये,

एक दिन खाण निकलने में
मटकी फूट गई थी,
बाबूजी कान ना उचारे मेरा 
इसलिए आम ने गूढ़की खाई थी,
रोज शाम को अपने हिस्से की चाय भी
मेरे गिलासी में डाल देना,
मेरे बचपन के भी क़िस्से रहे होंगे, 
अम्माँ के साथ चले गये,



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टिप्पणियाँ

  1. एक एक पंक्ति बचपन की याद दिला रही है....बोहोत अच्छा

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    1. कोशिश रहेगी की इसी तरह आपकी यादों को जिंदा रखे

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  2. "neula bhai naa rahiyen ta kaa hoi" meri mummy mujh se kahti hain, jab meri koi problem solve kar deti hain

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    1. अच्छा है लेकिन पीढ़ी इन कहानियो को भूल जाएगी

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  3. Meri pyari maa...leaver cancer detect huva tha 2 mahine pahele...aur vo last stage tha...18 October ko cancer ne hum se humari ma chhin li...bas ab sirf maa ki yaaden hai...
    Waise to maa hamesha hi yaad aati hai par..aap ki post padha ke jyaada hi yaad Aa gai....maa ki yaden anmol khazana hoti hai...nice post

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    1. सुनकर दुःख हुआ। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और आपको खुश रखे।

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