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#व्यंग्य - रथ दुर्घटना मामले से रिहा हुए दुर्योधन

लाक्षागृह में आग लगने के बाद दुर्योधन ने जश्न का ऐलान कर दिया। हस्थिनापुर की सत्ता और दुर्योधन के बीच खड़े रास्ते के सबसे बड़े काँटों का सफाया हो चुका था। लाक्षागृह से किसी का भी बचकर निकलपाना मुश्किल था इसलिए दुर्योधन ने राजमहल में आग लगने के बाद पांडवो के लास्ट स्टेटस अपडेट को देखना मुनासिब नहीं समझा और जश्न मनाने मे लग गया।

जश्न बहुत ही शानदार था। दुनिया के कोने कोने से सभी घाघ और बड़े बड़े षड्यंत्रकारी इस जश्न में मौजूद थे। बहुत से लोग ऐसे थे जो अपने सगे संबंधीयो को जान से मारकर सत्ता का सुख भोग रहे थे। दुशासन सभी मेहमानों की आवाभगत मे लगा था। उस समय की एक मशहूर नृत्यांगना अपने नृत्य से सभी का मन मोह रही थी। नृत्यांगना की आँखों से मदिरापान करते करते दुर्योधन ने बहुत मदिरापान कर लिया था।

दुर्योधन ने जब नृत्यांगना के साथ अश्लील हरकतें करने कि कोशिश करनी चाही तो उन्हें मामा शकुनी ने वहाँ से ले जाना उचित समझा। दुशासन ने दुर्योधन को रथ में बिठाया और महल की तरफ चल पड़ा, रथ कुछ ही दूर पहुंचा था कि पीछे से आवाज आई,"बगल हो जा आज रथ तेरा भाई रथ चलायेगा।" दुशासन ने लाख मना किया परंतु दुर्योधन ने उसकी एक भी बात नही सुनी।

दुर्योधन ने रथ को मुख्य रास्ते से बदलकर गरीबों की पुरानी बस्ती की तरफ मोड़ दिया। दुर्योधन नशे की हालत में रथ दौड़ाते हुए बस्ती से निकलता हुआ महल पहुंच गया। दूसरे दिन दुर्योधन २बजे दोपहर को उठकर राजसभा में आया तो पता चला कि कल पुरानी बस्ती में उसके रथ से कुचलने से कुछ गरीब लेखकों की मौत हो गई। मामला धृतराष्ट्र के पास विचारधीन था। धृतराष्ट्र सचमुच में तो अंधे थे परंतु पुत्र प्रेम ने उन्हें न्याय और अन्याय को देखने की क्षमता भी छीन ली थी।

धृतराष्ट्र को चलता तो वो मामले को तुरंत खारिज करदेते परंतु गंगापुत्र भीष्म के दबाव के कारण उन्हें इस मामले मे सुनवाई करके सजा तो सुनानी थी। दुर्योधन ने अपना पक्ष रखने के लिए मामा शकुनी को नियुक्त किया । बचाव पक्ष की तरफ से फरीयाद करनेवाल कोई काबिल व्यक्ति नही था क्योंकि पांडवों की मृत्यु के बाद कोई भी दुर्योधन से झगड़ा मोल नही लेना चाहता था।

शकुनी ने राजसभा के सामने घटना से जुड़े तथ्यों को रखना शुरू किया। उसके अनुसार तलवार से किसी का कत्ल हो जाए तो दोषी तलवार चलाने वाले को माना जाता है तो ठीक उसी तरह रथ को चलाने वाले को इस कत्ल की सजा मिलनी चाहिए। दुर्योधन रथ को हाक रहा था ये बात उसने पहले ही मान ली थी और कई चश्मदीद गवाहों ने भी उसे रथ चलाते हुए देखा था।गवाहों में एक विदुर भी थे जिन्हें डराना और खरीदना दुर्योधन के बस की बात नही थी।

प्रायः राजसभा को संध्याबेला से पहले समाप्त कर दिया जाता था परंतु मामला युवराज दुर्योधन का था इसलिए राजसभा का समय बढ़ा दिया गया था। शकुनी ने आगे तर्क रखना शुरू किया तो दुर्योधन ने उन्हें आँखें दिखाई परंतु शकुनी ने इशारे से उन्हें बैठने को कहा। शकुनी ने कहा महाराज दुर्योधन तो इतने नशे मे था कि वो स्वयं नही चल सकता था रथ कैसे चलाता! रथ तो रथ से बंधे दोनो घोड़े चला रहे थे वो स्वयं पुरानी बस्ती के रास्ते होते हुए गरीब लेखकों को कुचलते राजमहल पहुंच गए इसलिए मैं इन घोड़ो को कड़ी से कड़ी सजा देने के लिए आपसे अनुरोध करता हूँ।

महाराज धृतराष्ट्र को शकुनी का तर्क सही लगा वो वैसे भी पुत्रमोह में अंधे थे तो उन्होंने घोड़ो को बिना खाना पानी के एक सप्ताह तक कोठरी में बंद रखने के बाद गरदन काटकर तड़पा- तड़पा कर जान से मारने की सजा सुनाई जैसे रथ से कुचलने के बाद गरीब लेखक तड़प-तड़प कर मरे थे। पुरानी बस्ती को गिराकर वहाँ के सभी वासियों को जंगल में खदेड़ देने का निर्देश दिया गया जिससे भविष्य में फिर कभी कोई घोड़ा रथ खींचते हुए लोगो को कुचलकर ना निकल जाए। इस घटना के बाद शकुनी का वकालत का पेशा चल निकला।

सत्यमेव जयते!


कलयुग में कुछ इस तरह की घटना सलमान खान के साथ भी घटित हुई। लेकिन उन्हें भी कानून ने निर्दोष पाकर छोड़ दिया। 

धन्यवाद
@पुरानीबस्ती


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16 टिप्‍पणियां:

  1. वाह भाई गज़ब तुलनात्मक रूप से प्रस्तुत किया है व्यंग्य को, दुर्योधन को सलमान और धृतराष्ट्र को कानून.....बहुत बढ़िया।

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    1. ये सब आपके विचार है मैंने तो सिर्फ महाभारत की एक घटना का जिक्र किया है :)

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    2. जो भी हो मामला फिर से पुराने बस्ते में डाल दिया गया है

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    3. बहुत बढ़िया कटाक्ष हे कानून पर।।।शानदार

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  2. आजकल हर अखबार "असत्यमेव जयते" की खबर पढ़ा रहा है.... लगता इस शहर में सहनशीलता बहुत बढ़ गई है

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  3. वाह !! मैजूदा क़ानून व्यवस्था की परिस्थितियों का क्या खूबसूरत व्याख्यान किया है बेहद मनोरंजक तरीके से। आप के तरकश का एक और निशाने को भेदता तीर !!

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  4. Gizab kar diye bidu 👍
    One of your best ...:)
    I m in love with shakuni now :P
    COunt me as a regular visitor of Purani Bastee
    Please do dhelo these links on my TL ;)

    @Gajodhar_Bhaiya

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  5. अखबार में दे दीजिये. छप जायेगा.काफी अच्छा लिखा है.

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    1. यही हम भी कहते है लेकिन अख़बार वाले नहीं मानते :)

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  6. No wonder Duryodhan deserved a bigger punishment which he ultimately got

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    1. सही कहा गुरूजी, नेति सबको न्याय देती है

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  7. आज तक मैंने इससे अच्छा लेख नहीं पढ़ा,सर्वोत्तम,उत्कृष्ट

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