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बुलेट - #HugYourDad

मुंबई की बढ़ती भीड़ में मुंबई लोकल और बेस्ट बस का सफ़र हर दिन बद से बदत्तर होते जा रहा था. मुंबई की इस यात्रा की समस्या से छुटकारा पाने के लिए मैंने एक मोटर बाइक खरीदने की सोची. डाउन पेमेंट करने के बाद ३६ महीने तक हफ्ता भरना था. जितना अधिक डाउन पेमेंट होता हफ्ता उतना ही कम आता और ऊपर से बाइक आने के बाद रोज का पेट्रोल खर्च और मेरा महीने का खर्च भी संभालना था. यार्था को वीकेंड पर घुमाने ले जाने का खर्च तो अलग से था ही. 

यार्था और मेरा ऑफिस एक ही रस्ते में था. यार्था का ऑफिस हीरानंदानी पवई के पहले थे और मेरा ऑफिस हीरानंदानी पवई में था. यार्था भी रोज रोज की बस के धक्का - मुक्की से थक गयी थी वो भी चाहती थी की मै बाइक ले लू लेकिन उसका खर्चा मेरे से अधिक था. उसके पूरे परिवार की जिम्मेदारी का वहां उसे ही करना होता था इसलिए चाहते हुए भी वो बाइक खरीदने में मेरी कोई मदद नहीं कर सकती थी.

मैने पिताजी से कई बार बाइक के बारे जिक्र करने की बात सोची परंतु हर बार ये सोचकर रुक जाता था की पापा सोचेंगे अब कमाने लगा है उसके बावजूद अपनी छोटी मोटी जरूरते नहीं पूरी कर पा रहा है. मै बुलेट की नयी लांच हुई बाइक खरीदना चाहता था और इस बार में माँ से एक बार जिक्र भी किया था माँ ने कहा की कोई भी साधरण बाइक ले ले लेकिन मुझे तो बुलेट चलाने का शौक था इसलिए मै कोई और बाइक नहीं लेना चाहता था. 

मैंने अपनी फाइनेंसियल प्लानिंग करके अगले साल तक बुलेट लेने का प्लान बनाया. २४ मई को मेरा जन्मदिन था ऑफिस से पहले ही छुट्टी ले चूका था. मै और यार्था वाटर किंगडम जाने वाले थे. सुबह उठने के बाद मै नहा कर तैयार हो गया और माँ से कहा की मै रात को देर से लौटूंगा और उसके बाद घर से निकलने ही वाला था की पापा घर ने मुझे आवाज दी. मै पापा के पास गया तो उन्होंने मुझे एक चाभी दी "थंडर बर्ड". पापा ने मुझे गले लगा लिया और कहा पहली बार के लिए टंकी फुल करवादी है.

अब ना डाउन पेमेंट का झंझट था और ना EMIकी फिकर थी. मै और यार्था रोज बुलेट से ऑफिस जाते और घर आते. पापा के गई दिए गए उपहार में से ये एक सबसे प्यारा उपहार था.




“This father’s day, I am expressing my love towards my dad by participating in the #HugYourDad activity at BlogAdda in association with Vicks.”

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