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मोबाइल - बच्चे

आज कल के बच्चे पहले के बछो से अधिक होशियार हो गए हैं. ऐसे में टेक्नोलॉजी के प्रति उनका लगाव और चाहत दोनों का बढ़ना लाजमी है. आज कल बच्चे ढंग से खड्डे ना हो पाए लेकिन मोबाइल से खेलना उनके लिए आम बात है. ऐसे में आपका लेख  "Ways to Know Your Child Is Ready for a Phone" पढ़कर एक सीख मिली की बछो को मोबाइल देने का सही समय कब होता है.

आज कल के बच्चे होशियार के साथ लापरवाह भी होते जा रहे हैं. ऐसे समय में उनके ऊपर ध्यान रखना और भी जरुरी हो जाता है. ऐसे समय में उन्हें ये भी समझाना पड़ता है किहम जो भी कर रहे हैं उनके फायदे के लिए कर रहे हैं और मोबाइल से हम समय पर उनसे बातचीत कर सकते हैं और इसके अलावा वो फ़ोन करके अपने जरुरत की चीजो के लिए मोबाइल से फ़ोन करके हमें उनकी जरुरत के सामान लाने के लिए याद दिला सकते हैं.

पलको का उनके बच्चे के प्रति ख्याल रखना सही है लेकिन जैसा किआप ने बताया छोटे बच्चो और खासकर के स्कूल में जाने वाले बच्चों को जहाँ तक हो मोबाइल नहीं देना चाहिए. मुंबई के सभी स्चूलो में मोबाइल रखना वर्जित है. जूनियर कॉलेज और उसके बाद बच्चे मोबाइल अपने पास रक् सकते हैं इसलिए एक अभिवावक के नाते हमें उस बात का खयाल रखना चाहिए.

मोबाइल बच्चो के लिए खतरनाक भी हो सकता है आपके लेख में ये सबसे महत्वपूर्ण बात थी. आज कल बच्चे बिना सोचे समझे मोबाइल में अप्प इनस्टॉल कर लेते है जो मोबाइल से कई जानकारिया लेता रहता है और आगे चलकर उन जानकारियों का गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं. आपके लेख से काफी कुछ सीखने को मिला उम्मीद है आगे भी हमें ऐसा मौका मिलता रहेगा .

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