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#व्यंग्य - द यादव हू विल चेंज इंडिया

भागवन श्रीकृष्ण यदुवंशी थे और नंदलाल जी की गायों को भी बृज में चराते थे। यादवों का घास के प्रति आकर्षण शायद उस युग से आया होगा। कलयुग में यादव ग्वाल तो बन गए लेकिन गायों को पालने की जगह भैंस चराने लगे I

यादवों के चारे के प्रति प्रेम को चर्मोउत्कर्ष पर ले जाने का काम श्री लूल्लू यादव ने किया जिसे आप सभी चारा घोटला के नाम से जानते हैं। लूल्लू यादव के चारे के प्रति प्रेम को देश-विदेश की सभी मीडिया जगत ने प्यार दिया। लूल्लू यादव इस चक्कर में जेल भी हो आए।

लूल्लू यादव बाद दूसरे यादव जिन्होंने ने भारत के मानचित्र पर अपना नाम अमर किया वो हैं उत्पात प्रदेश के यादवधिराज मूल्ला यम यादव। मूल्ला यम यादव स्वयं तो तबेले के व्यापार में नही आये परंतु उनके एक मंत्री अभी भी भैंस हाकने का काम करते हैं और समय मिल गया तो उत्पात प्रदेश सरकार की नीतियों की संरचना करते हैं।

लूल्लू यादव और मूल्ला यम यादव तो स्वयं को जयप्रकाश और लोहिया जी के शाहगिर्द बताते हैं परंतु ये बात उतनी ही सत्य जितनी मुझे भारतरत्न मिलने की गुंजाइश है। परंतु इस लेख मे अब जिस यादव का जिक्र करने जा रहा हूँ उन्हें आप भगवान तो नही लेकिन कम से कम यादवों का केजरीवाल कह सकते हैं।

आज के इस कलयुग में जहां भाई अपने भाई का गला काट रहा है और नेता अपने गाँधी के कलेक्शन को बढ़ाने मे लगा है, इस यादव ने जो किया वो यादव समाज को देखते हुए चमत्कार लगता है। एक तरफ जहां लूल्लू यादव और मूल्ला यम यादव घोर अपराधों के दोषि होने पर भी त्यागपत्र नही देते वही अपने राहुल यादव हर बात पर रॅाकेट की तरह त्यागपत्र उड़ा देते हैं।

राहुल देश के पहले यादव हैं जो महबूबा के नखरों की तरह हर बात पर त्यागपत्र दे देते हैं। यदि लूल्लू और मूल्ला इस यादव से कुछ सीख लेंगे तो भारत की जनता, खासकरके उत्पात प्रदेश और बिहाड़ की जनता को काफी लाभ मिलेगा।

इसलिए राहुल यादव के लिए मैं इतना कहूंगा,"द यादव हू विल चेंज इंडिया"

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