​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

#कविता - लीची का पेड़














बनारस की गलियों से
कुछ लीची खरीद के लाये थे,

खाने के बाद बीज फेंक दिए
घर के पिछवाड़े,

बरसात के दिनों में
एक नन्हा पौधा जनमा,
धीरे - धीरे बड़ा हुआ,
बाड़ की आड़ में खड़ा रहा,

देता मीठे फल हमको,
और
कुछ पंछियो ने घोसले बनाये थे,
नन्हे बच्चों की
किलकारी से महकता था,

अब धीरे - धीरे सुख रहा है
वो लीची का पेड़,
लगता है पंक्षियों ने भी
अब मजहब के नाम पर फसाद शुरू कर दिया है.

टिप्पणियाँ

  1. बहुत बढ़िया लेखन, आज के हालात में जब आपसी वैमनस्य सर चढ़ कर बोल रहा, आपकी कविता सोचने पर मज़बूर करती है कि आखिर कहाँ जा रहे हैं हम?

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्यवाद, बात आपकी सही है चलिए देखते है आग क्या होता है

      हटाएं
  2. राजनीतिक चिंतन पर आपके लेखों और कविताओं ने मुझे पढ़ने के लिए विवश किया जिसमें आपने सुन्दर और रहस्यमयी व्यंग्य के माध्यम से बहुत कुछ समझानें का प्रयास किया है .........ऐसे ही हमारा मार्गदर्शन भी करते रहे .....आभार

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्यवाद प्रभात जी, आपके विचार मेरे लिए बहुत बहुत अमूल्य हैं

      हटाएं

एक टिप्पणी भेजें