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#ब्वॅाय_फ्रॅाम_बॅाम्बे - 2 (ड्रामा)

अब मैं अपने पैर पर खड़ा हो चुका था, मतलब दो साल का हो गया था। चलने लगा था और कभी काल दौड़ भी लेता था। मेरे चलने दौड़ने पर मम्मी-पापा इतने खुश हो जाते थे मानो ओलंपिक में गोल्ड मैडल जीतकर ला रहा हूँ। धीरे - धीरे थोड़ी फ्रेंच बोलना भी सीख गया था जिसे समझने की लोग बहुत कोशिश करते परंतु समझ नही पाते थे। घर के सामने ही मिट्टी भरपूर मात्रा में उपलब्ध थी तो इसका नित्य सेवन भी शुरु कर दिया था।

अचानक से गांव से तार आया कि दादाजी की तबीयत खराब हो गई है। पिताजी ने तार का जवाब दिया और  छोटे चाचा से दादाजी को जल्द से जल्द बॅाम्बे लेकर आने को कहा। चाचा जी और दादा जी एक सप्ताह के भीतर दहिसर आ गए। उन्हें देखकर कोई नही कह सकता था कि वो बीमार है। वो हेमा मालनी के बहुत दीवाने थे शायद उनसे मिलने के लिए बीमारी का बहाना करके बॅाम्बे चले आए थे। लेकिन यहाँ उन्हें हेमा जी से मिलाने वाला कोई नही था।

दादाजी ने पिताजी से कहा कि उन्हें सांस लेने मे तकलीफ हो रही है। पिताजी ने तुरंत उन्हें साथ लिया और हस्पताल के लिए चल दिए। हमारे गाँव के एक साहब मुंबई के बड़े हस्पताल के बाहर अखबार बेचते थे तो हस्पताल में भर्ती करना ज्यादा मुश्किल काम ना हुआ। दादाजी भी मजे से खाट पर लेटकर आने जाने वालो से मिलते। डॅाक्टर ने कई तरह की रिपोर्ट निकालने को कहा । पैसे तो पिताजी के पास थे नही तो उधार लेकर सारा काम चल रहा था।

डॅाक्टर ने कुछ दिनो के बाद रिपोर्ट देखकर बताया कि इनके दिल में कुछ समस्या है, सभी लोग हसने लगे कि रिपोर्ट में भी ये आ गया क्या की वो हेमा मालनी के दीवानो में  है। डॅाक्टर ने सभी को घूरते हुए कहा , ये मजाक का समय नही है। उनके दिल में कुछ  गाठ जैसा
 उभर रहा है और हमें जल्द से जल्द उनका ओपरेशन करना होगा । दादाजी को भी ये बात बता दी गई। ओपरेशन की तैयारी शुरू हो गई। दादाजी को ओपरेशन रुम मे जाने कि तैयारी हो रही थी। पापा मुझे साथ मे लेकर दादाजी के सिरहाने बैठे थे।

अचानक से दादाजी की नब्ज बंद हो गई। डॅाक्टर सामने ही खड़ा था। परंतु कुछ कर ना पाया , देखते देखते दादाजी के प्राण पखेरू उड़ गए। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में पता चला कि उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हो गई। उनके दिल की गांठ का इसमे कोई योगदान नही था, सारा योगदान उनके मन मे बसे भय का था।  ओपरेशन के नाम से उन्हें काल देवता ने घेर लिया और वो देखते देखते इस दुनिया को छोड़कर चले गए। कभी कभी सोचता हूँ यदि दादाजी को हेमा जी से मिलने का मोह नही होता तो वो ना मुंबई आते और ना इतने जल्दी उनका देहांत होता।

दादाजी की मृत्यु के बाद उनका दाह संस्कार तो बॅाम्बे मे हुआ परंतु उनकी तेरहवीं करने के लिए हमे गांव जाना था। वैसे उत्तर प्रदेश में विवाह और तेरहवीं की भीड़ में कोई अंतर नही होता है। पापा के पास पैसे तो नही थे तो लोगो से उधार लेकर हमने गांव की तरफ का रुख किया। पापा के एक मित्र सुभाष बाबु हमे स्टेशन तक छोड़ने के लिए आए और फिर उन्होंने कहा कि उन्हें कल्याण कुछ काम से जाना है। पापा भी बोले तो चलो हमारे साथ कल्याण उतर जाना।

महानगरी ट्रेन वीटी से छूटने के बाद सीधे ठाणे स्टेशन पर रुकी। कोल्डड्रींक वाले को देखकर मैंने कोल्डड्रींक खरीदने की जिद शुरु कर दी, पापा ने मुझे आँख दिखाई लेकिन सुभाष चाचा को देखकर मेरे अंदर का डर गायब हो गया था । मैं जोर जोर से रोने लगा तो सुभाष चाचा ट्रेन से उतरे और तीन बोतल कोल्डड्रींक लेकर आए। पापा और मैंने कोल्डड्रींक पीना शुरु किया परंतु मम्मी नही पी रही थी लेकिन पापा के जोर देने पर उन्होंने भी कोल्डड्रींक पी लिया ।

अगले दिन सुबह जब मैं सोकर उठा तो मम्मी रो रही थी और पापा उदास बैठे थे। हमारा सारा समान गायब था और सुभाष चाचा भी शायद कल्याण उतर गए थे। उन्होंने शायद कोल्डड्रींक में नशे की गोलियां मिला दी थी जिसको पीकर पापा-मम्मी बेहोश हो गए और वो सारा समान लेकर उतर गया । तेरहवीं के लिए गांव पहुंचे तो जिताना कर्ज बॅाम्बे में लिया था उतना कर्ज फिर से गांव में लेना पड़ा। तेरहवीं की भीड़ देखकर कोई ना कह सकता था कि शोक सभा का भोजन हैं।

हमारे गांव से आनेपर पता चला कि सुभाष चाचा को एक दिन काम के समय करंट लग गया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मम्मी ने खबर सुनी तो कहा पाप का फल तो भोगना ही था। पापा ने कहा हा वो तो भोगे बगैर मर गया लेकिन अब उसके पाँच बच्चे और विधवा जिंदगी भर पापा का फल भोगती रहेंगी।


- अगले गुरुवार को भाग 3 के साथ मिलेंगे. इस कहानी में कुल १२ भाग है और हर गुरुवार को हम नए भाग के साथ मिलेंगे . आप इस कहानी पे अपनी टिपण्णी हमें जरूर लिखें.

#ब्वॅाय_फ्रॅाम_बॅाम्बे - 1 (ड्रामा)


4 टिप्‍पणियां:

  1. भाई किस स्याही में भिगो कर शब्दों को लिखते हैं आप _/\_ अब तो आपको किताब लिखनी शुरू कर देनी चाहिये। आप माने या न माने आपका लेख जब भी पढ़ना शुरू करता हूँ,पता नहीं क्यों , न चाहते हुए भी उसमे खो जाता हूँ। बहुत ही बेहतरीन :D

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    1. भाई आपकी तारीफ सुनकर दिल कर रहा है इस पोस्ट के डिलीट कर दूँ :) (मजाक कर रहा था टिपण्णी के लिए धन्यवाद)

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  2. उत्तर
    1. धन्यवाद - अगले गुरुवार को जरूर आना

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