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#ब्वॅाय_फ्रॅाम_बॅाम्बे - 5 (ड्रामा)

लव, सेक्स और धोखा

झुग्गी झोपड़ीयां धीरे धीरे पक्की चॅाल मे तब्दील हो रही थी। लेकिन मुंबई की इस नई चॅाल में सीमेंट की छप्पर रखकर बनाया जाता था जो गरमी के दिनों में खूब तपता और बरसात के महीनों में तड़-तड़ की आवाज से कोलाहल करता था। लेकिन हमारे मोहल्ले में ये गति बहुत धीमी थी। हमारे अगल बगल के लोग बहुत गरीब थे तो अभी भी दीवार लोखन के पतरो की थी।

हमारे मोहल्ले में एक नवयुवक अकेले ही रहता था, उसने एक जवान खूबसूरत लड़की को फंसा रखा था। लोगों का मानना था कि वो लड़की बार में काम करती थी। बात सच ही थी क्योंकि उसे लोग कई बार डांस बार के बाहर देख चुके थे। वो लड़की उस नवयुवक के घर सप्ताह में दो तीन दिन आती और रात को वो उसके घर से चली जाती थी। 

एक दिन संज्या ने मुझसे कहा चल तुझे एक खेल दिखाता हूँ। मैं भी खेल देखने के चक्कर में संज्या के साथ चल पड़ा। हम धीरे धीरे उस नवयुवक के गली में घूमे।उसके घर के तीन तरफ तो सीमेंट की दीवार थी लेकिन एक तरफ से नाला बहता था और उस तरफ लोखन के पतरे की दीवार थी। संज्या ने मुझे चुपचाप नाले की तरफ चलने का इशारा किया। मैं भी चुपचाप उस तरफ चोर की तरह दबे पांव चल दिया।

नाले की तरफ से मैं संज्या के साथ पतरे के एक होल में आँख लगाकर बैठ गया और एक तरफ संज्या बैठा था। घर खाली था तो मैंने संज्या से कहा, तूने तो खेल दिखाने की बात कही थी? कहा है खेल? संज्या ने कहा तू चुपचाप बैठ जा और सही समय का इंतजार कर। मैंने संज्या की बात मानी और चुपचाप बैठकर इंतजार करने लगा। एक घंटे से अधिक का समय बीत गया था लेकिन कोई खेल ना दिखा। मैं संज्या पर झल्लाया और वहाँ से उठकर जाने ही वाला था कि वो नवयुवक घर में दाखिल हुआ।

संज्या ने मुझे झट से इशारा करके फिर से बैठने के लिए कहा। मैं भी खेल देखने के लिए उत्सुक था तो झट से अपनी जगह बैठकर पतरे के होल में निगाहें गड़ा लिया। कुछ देर में वो बार गर्ल भी कमरे में आई और फिर वो  युवक शराब के दो गिलास लेकर आया और फिर दोनों साथ बैठकर पीने लगे। लड़की ने गिलास बाजू में रखकर अपनी बाहें लड़के के गले में डाल दी।

दोनों धीरे धीरे एक एक करके एक दूसरे के कपड़े उतार रहे थे और कुछ पलो में दोनों एक बिस्तार पर बिना कपड़ों के लेटे थे। उन्हें इस अवस्था में देखकर मुझे शरम आ गई लेकिन संज्या ने मुझे इशारे से पूछा, खेल में मजा आ रहा है ना? संज्या मुझसे उम्र तीन साल बड़ा था तो उसे इस खेल का पूरा आनंद मिल रहा था लेकिन मेरे छोटे चेतन को इस खेल में कोई मजा नही आ रहा था।

खेल आगे बढ़ा। लड़के ने उस लड़की को नीचे सुला दिया और उसके ऊपर चढ़कर, उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और उसके बीच घुसकर जोर जोर से धक्का देने लगा। वो लड़की भी रह रहकर कुछ अजीब सी आवाजें करती और उस लड़के को अपनी ओर पकड़कर खीचती। खेल देखकर ऐसा लग रहा था कि दोनों को खेल में मजा आ रहा था।

कुछ देर के बाद लड़का नीचे उतर गया और लड़की उसके ऊपर चढ़ गई। इतने गोरा बदन पहले कमरे के अंधेरे में नही झलक रहा था परंतु उसके ऊपर आने पर एक एक अंग जैसे दूधिया रंग में नहाकर मचल रहा हो। उसकी स्तन बड़े बड़े और गोरे थे। लड़का उन्हें अपने मुँह में डालकर चूस रहा था और लड़की उसके ऊपर बैठकर उछल रही थी। कुछ देर में दोनों बिस्तर पर सो गए। 

संज्रा ने मुझे उठने का इशारा किया और हम वहा से उठकर घर चल दिये। रात में माँ के सोने के बाद मैं चुपचाप बब्बी के पास गया और उसके सारे कपड़े उतारकर उसकी टांग फैलाकर उसको धक्का देने लगा। बब्बी कुछ बोलना चाहती थी लेकिन उसे मुझसे डर लगता था इसलिए वो चुपचाप मेरे इस खेल को समझने की कोशिश कर रही थी कुछ समय तक धक्का मारने के बाद मुझे इस खेल में कोई मजा नही दिखा और मैं चुपचाप उसे कपड़े पहनने का इशारा करके एक तरफ जाकर सो गया। 

दो दिन के बाद संज्या फिर से खेल देखने के लिए मुझे बुलाने आया तो मैंने उसे मना कर दिया लेकिन उसने मुझे मां कसम देकर चलने को कहा तो मुझे मजबूरन उसके  साथ जाना पड़ा। हमारे पहुंचने से पहले ही आज खेल खतम हो चुका था वो लड़की रो रही थी और लड़का उससे कुछ दिन की मोहलत मांग रहा था कि तभी उस लड़की ने रोते रोते अपने पर्स में से एक बंदूक निकाली और लड़के के छाती पर रखकर चला दी। 

उसके बाद वो कमरे से बाहर निकली और एक टैक्सी में बैठकर चली गई जो शायद पहले से उसका इंतजार कर रही थी। धीरे धीरे मोहल्ले वाले जमा हुए फिर पुलिस आई। उसके बाद कभी खेल देखने को ना मिला और वो बार गर्ल भी हमारे मोहल्ले में कभी नही दिखी।

- अगले गुरुवार को भाग 3 के साथ मिलेंगे. इस कहानी में कुल १२ भाग है और हर गुरुवार को हम नए भाग के साथ मिलेंगे . आप इस कहानी पे अपनी टिपण्णी हमें जरूर लिखें.

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