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#ब्वॅाय_फ्रॅाम_बॅाम्बे - 4 (ड्रामा)

मुंबई धीरे धीरे अपना सर उठा रही थी । हर तरफ तेज गति से वाहन दौड़ रहे थे। इस रफ्तार का हिस्सा बनकर कई लोग बुलंदी को छू रहे थे और कुछ सोहदे-आलसी काम ना मिलने का रोना रो रहे थे। जो करना चाहता था उसके लिए चारो तरफ काम था और जो नही करना चाहता था उसे लाख ढूंढने पर भी काम नही मिलता था। एक छोटी सी पान की दुकान वाला भी अपने अठारह घंटे की मेहनत से पैसे की बरसात कर रहा था।

सब कुछ सही चल रहा था और फिर अचानक एक दिन भूचाल सा मच गया। कुछ राजनैतिक दलों ने बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया। मेरे पापा बताते थे कि बाबरी मस्जिद पहले भगवान श्रीराम का मंदिर था। मुगल जब भारत आए तो उन्होंने हर तरफ बर्बरता फैला रखी थी। हिंदूओ के देश में हिंदूओ से ही पूजा पाठ के नाम पर कर वसूली होने लगी थी। मुगलों ने कई गांवों को तबाह कर दिया । अनगिनत मंदिरों को धूल में मिला दिया। श्रीराम का मंदिर उसे पसंद आया तो प्रभु की मूर्ति पलटकर वहाँ मस्जिद का निर्माण कर दिया। पापा की कहानी रोचक थी परंतु सत्य है या नही इसका फैसला नही हुआ।

बाबरी मस्जिद के गिरने के बाद पूरे देश में कोलाहल मच गया। हर तरफ दंगे और मारकाटा का दौर शुरू था। हिन्दू मुसलमानों को और मुसलमान हिन्दूओ को जान से मार रहे थे या यह कहना गलत ना होगा कि हिन्दू और मुसलमान इंसानियत का कत्ल कर रहे थे। दंगा हर तरफ जान माल का नुकसान कर रहा था परंतु धर्म की पट्टी आँखों पे बांधने के बाद इंसान को कुछ नही दिखता है। हमारे यहाँ भी आये दिन कोलाहल मचा रहता था और एक दिन सुबह गनी भाई का पूरा परिवार मृत पाया गया। बब्बी को कुछ नही हुआ था क्योंकि वो उस दिन मेरे घर पर सो गई थी।

गनी भाई के घर का सारा समान गायब था। पुलिस के आने पर थोड़ी पूछताछ हुई परंतु पुलिस का रवैया देखकर लगा कि दंगों में लोगो का मरना कोई विशेष बात नही है। पंचनामा करके कुछ गवाहों को साक्षी बनाकर पुलिस चली गई। पापा को छोड़कर मोहल्ले के हर व्यक्ति को पता था कि ये काम किसने किया है। मोहल्ले वालो ने पापा को इस कत्ल की भनक ना लगने दी क्योंकि उन्हें पता था पापा इस काम के लिए कभी तैयार ना होते थे। दूसरे दिन गनी भाई के घर का सारा सामन घर से थोड़ी दूर एक जगह फेंका हुआ मिला। पापा, मैंने और बब्बी ने जो समान थोड़ा ठीक था उसे घर लाकर रख दिया। गनी भाई के परिवार का अंतिम संस्कार पुलिस ने कर दिया क्योंकि उनका कोई रिश्तेदार नही था और वो बब्बी को लाश देने के लिये तैयार नही थे।

गनी भाई का घर जलाकर मोहल्ले वालो को एक क्लब रूम मिल जाता परंतु बब्बी के कारण उनके घर पे कब्जा करने का सारा सपना टूट गया, बब्बी अब हमारे घर पर रहती थी। माँ को बब्बी से थोड़ा झिझक थी परंतु धीरे धीरे वो झिझक भी दूर हो गई। अब माँ उसे बेटी की तरह पालने लगी पापा भी उसे बहुत प्यार करते थे।

मुंबई में जब दंगों के हालत थोड़े सुधरते दिखे तब तक एक दिन मुंबई में कई जगह बम ब्लास्ट हुए। एक मुसलमान टपोरी दाऊद ने कुछ मुसलमानों को जिहाद और अन्याय के नाम पर बरगला का उनसे मुंबई के भीड़ वाले इलाकों में बम ब्लास्ट करवा दिया। बंब ब्लास्ट के बाद मद्धम हो रही आंच को फिर से हवा मिल गई और मुंबई में कत्ले आम का एक नया मंजर शुरू हुआ। दीवाली के महीने में मुंबई वाले खुन की होली खेल रहे थे।

पापा ने पास के मुसलमान मोहल्ले में शांति का पैगाम लेकर जाने का निर्णय लिया। आपस में लोगों को मारकर क्या लाभ होगा परंतु पापा के इस प्रस्ताव को हमारे मोहल्ले के लोगो ने मानने से साफ मना कर दिया परंतु पापा ने उसके बावजूद मुसलमान मोहल्ले में जाने की हठ ना छोड़ी। मम्मी मना कर रही थी , मैं और बब्बी पापा से लिपटकर रो रहे थे लेकिन पापा पर उस दिन गाँधी जी का भूत सवार था उन्हें चैन और अमन की दरकार थी। परंतु गाँधी का जमान लद चुका था पापा जिस दिन मुसलमानों के मोहल्ले में गए उस दिन उनके मोहल्ले में ग्यारह लड़कीयो का बलात्कार करके जिंदा जला दिया गया था। पापा के वहाँ पहुँचते ही उन्होंने सिर्फ एक हिंदू को देखा, पापा कुछ कहते उससे पहले ही उनके गर्दन पर तलवार चल चुकी थी। एक और गाँधी का कत्ल हो चुका था।


- अगले गुरुवार को भाग 5 के साथ मिलेंगे. इस कहानी में कुल १२ भाग है और हर गुरुवार को हम नए भाग के साथ मिलेंगे . आप इस कहानी पे अपनी टिपण्णी हमें जरूर लिखें.

#ब्वॅाय_फ्रॅाम_बॅाम्बे - 1 (ड्रामा)


1 टिप्पणी:

  1. भावुक हुए बिना नहीं रहा जा सकता।
    गाँधी को तो हलाक होना ही था सो हो गए।

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