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#ब्वॅाय_फ्रॅाम_बॅाम्बे - 7 #ड्रामा

चंदा कुमारी

चंदा कुमारी अपने पति के साथ बॅाम्बे में आई थी। बॅाम्बे में उन्हें एक बेटा हुआ जो मैं हूँ। हिंदू मुस्लिम दंगों में चंदा कुमारी के पति की मौत हो गई। चंदा कुमारी के पति की मृत्यु के समय उनकी उम्र  २७ साल के करीब रही होगी। पति भी स्कूल में शिक्षक था तो कुछ पैसे पीछे छोड़कर नही गए थे। सब मिलाकर यही एक घर था जिससे सर छिपाने के लिए जगह खोजने की जरूरत नही थी।

चंदा कुमारी को रहने की समस्या नही थी लेकिन तीन पेट पालने की चिंता उन्हें करनी थी। अपने बेटे से अधिक चिंता उन्हें बब्बी की रहती थी। बब्बी का पूरा संसार चंदा कुमारी ही थी। कबीर तो उस बेचारी को दिन भर बहाने बनाकर पीटता रहता था। चंदा कुमारी के बेटे का नाम कबीर था। जो इस कहानी का मुख्य पात्र था। कबीर  अब तक स्वयं कहानी सुना रहा था लेकिन अब आगे की कहानी मैं सुनाने वाला हूँ।

चंदा कुमारी जी अगल बगल के घर में झाड़ू पोछा करके बब्बी और  कबीर का पेट किसी तरह पाल रही थी। घर वाले बार बार चंदा कुमारी को दूसरा विवाह करने को कह रहे थे लेकिन चंदा कुमारी इस बात के लिए राजी नही थी। चंदा कुमारी तो सती प्रथा में विश्वास करने वाली थी शायद उनका चलता तो वो मास्टर साहब की मृत्यु के साथ सती हो जाती परंतु तब ये संभव ना था।

कबीर के स्कूल छोड़ने के बाद वो आवारागर्दी के साथ साथ थोड़ा बहुत छोटा छोटा काम करने लगा था। अब चंदा कुमारी को पहले के मुकाबले कम मेहनत करनी पड़ती थी। बब्बी ने भी लोगों के कपड़े सिलने शुरू कर दिए थे। अशोक वन की पहली महिला जेन्टस टेलर थी। उससे कपड़े सिलाने के लिए वहाँ के सारे लड़के पहुंचे रहते थे। चंदा कुमारी को ये बात पसंद नही थी लेकिन बब्बी लाख समझाने के बाद भी मानने को तैयार नही थी।

समय के साथ-साथ कबीर भी अधिक पैसे कमाने लगा और चंदा कुमारी ने काम करना छोड़ दिया। बब्बी का जेन्टस टेलर शॅाप अच्छा चल रहा था लेकिन चंदा कुमारी के कहने पर उसने एक लेडीज शलुन खोल लिया। अब उसके घर पर मोहल्ले की सभी लड़कीयां सजने सवरने आती थी। चंदा कुमारी ने अब मन ही मन निश्चय कर लिया कि वो बब्बी और कबीर की शादी करवा देंगी। इस शादी के लिए उनके घरवाले कभी राजी नही होते क्योंकि बब्बी मुसलमान थी।

चंदा कुमारी ने एक दिन बब्बी को अपने पास बुलाकर बिठाया और उसके साथ बचपन से हुई अब तक कि सभी सुनहरी यादों को बांटने लगी। माँ को अचानक से इतना भावुक देखकर, बब्बी ने पूछ लिया क्या बात है माँ? चंदा कुमारी ने कहा बेटी अब मैं चाहती हूँ कि कबीर और तेरी शादी करवा दू। बब्बी ने माँ के मुख से अपनी कामना पूरी होती हुई देखी और शरमाकर आँखें नीचे कर ली।

चंदा कुमारी ने कबीर को बुलाकर अपना फैसला सुना दिया। कबीर तो बचपन से ही संज्या के साथ खेल देखकर आने के बाद बब्बी के साथ वो खेल खेलना चाहता था। उसे माँ की इस बात पर कोई आपत्ति नही हुई। कबीर का मानना था कि वो अभी शादी के लिए छोटा है लेकिन चंदा कुमारी ने कहा कि यदि तुम लोग एकबार घर बसा लो तो मैं अपने पोतो का मुँह देखकर तीर्थ यात्रा पर चली जाऊँ।

शादी की तारीख छोड़कर सब कुछ तय हो चुका था। बब्बी, कबीर और चंदा कुमारी सभी के जीवन में खुशी के पल कुछ क्षड़ो की लिए लौट आए थे।


- अगले गुरुवार को भाग 8 के साथ मिलेंगे. इस कहानी में कुल १२ भाग है और हर गुरुवार को हम नए भाग के साथ मिलेंगे . आप इस कहानी पे हमें अपनी टिपण्णी जरूर लिखें.

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