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#व्यंग्य - स्याही से हुई अभिमन्यु की वर्चुअल मृत्यु

कुरुक्षेत्र में दोनों तरफ की सेनाएं आकर अपना अपना स्थान ले चुकी थी। युद्ध आरंभ होने से पहले दोनों तरफ के महाबली अपनी अपनी सेना का निरक्षण कर रहे थे और विरोधी सेना के सैन्य बल को परखने की कोशिश कर रहे थे।

अचानक से अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा, केशव ये कैसा युद्ध है? यहाँ तो मुझे अपने ही सगे संबंधियों का कत्ल करना है। अर्जुन की बातों को बहुत इत्मीनान से सुनने के बाद श्रीकृष्ण ने कहा,"हे पार्थ यही तो समय है अधर्म का विनाश करके धर्म की स्थापना करने का, तुम  धर्म के लिए लड़ रहे हो.............

श्रीकृष्ण भगवद्गीता का ज्ञान देते रहें लेकिन अर्जुन युद्ध के लिए तैयार नही हुआ। अंततः श्रीकृष्ण ने अर्जुन को स्याही शस्त्र का ज्ञान दिया। दोनों तरफ के सेनापतियों को बुलाकर बता दिया गया कि पूरा युद्ध अब स्याही से लड़ा जाएगा।

शंखानाद होने के साथ ही युद्ध आरंभ हुआ। अर्जुन ने अपने चमत्कारी स्याही के अस्त्रों द्वारा कई लोगों को धराशायी कर दिया। नीले रंग से लथपथ होने वाला व्यक्ति तब तक लड़ सकता था जबतक उसपर लाल रंग की स्याही ना फेंक दी जाए। और लाल रंग की स्याही पड़ते ही उस व्यक्ति की वर्चुअल मौत मान ली जाएगी।

युद्ध के दूसरे चरण में द्रोणाचार्य ने चक्र व्यूह की रचना की, अर्जुन उस दिन किसी दूसरे छोर पर लोगो पर स्याही बरसा रहे थे। अभिमन्यु ने युधिष्ठिर से चक्र व्यूह को तोड़ने की आज्ञा ले ली और चक्र व्यूह के अंदर घुस गए परंतु चक्र व्यूह के मध्य तक पहुँचते पहुँचते उनका स्याही वाला सारा गुब्बार खतम हो गया।

अभिमन्यु को निहत्था देखकर उसे दुर्योधन की सेना के बड़े बड़े महावीरो ने घेर लिया। अभिमन्यु को चारों तरफ से स्याही की मार झेलनी पड़ी और फिर जयद्रथ ने बड़ी बेरहमी से अभिमन्यु के चेहरे पर लाल रंग स्याही पोत दी। अभिमन्यू अब लाल रंग से लथपथ था और उसकी वर्चुअल मौत की घोषणा कर दी गई।


इस अस्त्र का उपयोग आजकल कलयुग में बढ़ गया है और स्याही फ़ेंककर लोगो की वर्चुअल हत्या की जा रही है जिसे कुछ लोग भारत के तालिबानी करण से जोड़कर देख रहें हैं।  

क्रमशः


धन्यवाद
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