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#व्यंग्य - हिरण मृत्यु के केस में राम गिरफ्तार

शिकार करना भारतीय कानून की धारा के तहत अपराध है लेकिन जब माँ सीता ने भगवान श्रीराम से सोने के चलते फिरते हिरण को मारके लाने के लिए कहा था उस समय उन्हें भारतीय अधिनियम की धारा का ज्ञान नही था और वैसे भी ज्ञान होता तो भी वो इस बात की जिद नही करती इसकी कोई गारंटी भी नही थी।

यदि तर्क से आगे बढ़ना है तो हमे इस बात को मानना होगा कि ज्ञान हो या ना हो परंतु सीता माँ को हिरण के लिए तो जिद करना ही था अन्यथा रावण उनका अपहरण करने नही आता और १४ बरस का  वनवास श्रीराम के साथ हँसते-खेलते में कट जाता और सभी खुशी-खुशी अयोध्या को लौट जाते, परंतु नियति को यह सब नही मंजूर था और राम हिरण मारने निकल गए और अंततः हिरण का वध कर दिया......

हिरण के वध से बचना इतना आसान नही है। सालों साल कोर्ट,के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बड़े बड़े वकीलों को पैसा खिलाना पड़ता है..... ना भरोसा हो तो सलमान खान से पूछ लो।

वही कलयुग में एक तरफ नया पढ़ा - लिखा वकील पिछले कुछ दिनों से केस पाने के लिए न्यायालय के इर्द-गिर्द रोज चक्कर लगाता था। केस तो उसे मिल नही रहा था तो उसने सोचा क्यो ना कोई विवादास्पद मुद्दा ढूंढकर नाम कमाया जाए और हमारे देश में रामसे अधिक विवादास्पद क्या हो सकता है। उसने न्यायालय में हिरण की हत्या का केस दाखिल कर दिया।

अब कलयुग में राम का आना लाजमी नही था तो नारायण नारायण करते नारदजी मामले की पहल करने के लिए न्यायालय में हाजिर हो गए। नारद जी के पास वकालत की डिग्री नही थी इसलिए उन्हें बता दिया गया की केस हारने पर उन्हें ऊपर की अदालत में अपील करने का अधिकार नही मिलेगा। कोर्ट ने पहली तारिख पर श्रीराम को १लाख रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ दिया।

कई साल केस चलने के बाद नारद जी ने ये जिरह करके केस जीत लिया की हिरण एक इंजीनियर था। उसके माँ-बाप ने बहुत कर्ज लेकर उसे पढ़ाया लिखाया था और इंजीनियरिंग की पढ़ाई उसने जैसे तैसे करके पास की थी। हर सेमिस्टर में किसी ना किसी विषय में केटी लगने के कारण उसे कैंपस प्लेसमेंट नही मिला और अन्यथा दुनिया से थक हारकर वो आत्महत्या करने जा रहा था कि श्रीराम का बाण उसे लग गया।

न्यायालय ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए श्रीराम को बेगुनाह करार दिया और उन्हें हिरण की हत्या मामले से बाईज्जत रिहा कर दिया गया।

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