​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

#कविता - गमों को आंगन में बिखरे देखा

बहुत दिनों बद जब पुराने घर पहुँचा,
तो कई गमों को आंगन में बिखरे देखा।

कहा रहते हो शायर?
एक छोटे गम ने पूछ लिया,
उससे मैं पहले नही मिला था,
जब बात बढ़ी तो पता चला,
उसके दादा के साथ 
मैंने कुछ वक्त बिताया है।

वो नन्हा गम बताने लगा कि,
दादा जी रोज तुम्हारी तारीफ करते थे,
कई साल बिताया था उसके दादा जी ने मेरे साथ,
बचपन से साइकिल चलाना चाहता था,
लेकिन शहर जाने तक कभी नही चला पाया

कुछ और गम भी बिखरे हैं,
एक गम तो आखरी सांसें गिन रहा है,
शायद वो मेरे गाँव न लौट पाने का गम है,
अब जो मैं लौट आया हूँ,
लगता नही वो कुछ और दिन जी पाएगा।

एक गम और है जो जन्म ले रहा है,
पनपने पर पता चलेगा 
वो क्या लेकर आया है,
जिंदगी से मौत का सफर,
ये गम ही आसान करतें हैं।

बहुत दिनों बद जब पुराने घर पहुँचा,
तो कई गमों को आंगन में बिखरे देखा।

टिप्पणियाँ

  1. सच जाने कितनी ही यादों में डूब-उतर जाता हैं मन अपने पुराने घर द्वार देख .... चुपचाप देखते हैं वे हमें और हम उन्हें, ऐसे में शुन्य को ताकते रह जाते हैं, हाथ मलते रह जाते हैं ...

    बड़ी भावुक कर देने वाली हैं आपकी कवितायेँ
    बहुत अच्छी लगी ..

    उत्तर देंहटाएं
  2. वक़्त के तेज गुजरते लम्हों में कई बार मन कहता है इसी तरह

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें