badge पुरानीबस्ती : नौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली
चाँद भी कंबल ओढ़े निकला था,सितारे ठिठुर रहें थे,सर्दी बढ़ रही थी,ठंड से बचने के लिए, मुझे भी कुछ रिश्ते जलाने पड़े।

Wednesday, May 3, 2017

नौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली








इस फोटो में दिखाई गई जंगली बिल्ली, ईसाई है

बचपन से 'नौ सौ चूहे खाके बिल्ली हज को चली" की कहावत सुनता आ रहा हूँ। आप लोगों  ने भी सुना होगा। लेकिन क्या आप लोगों ने सोचा कि बिल्ली इतने सारे चूहे खाकर चलने के काबिल बची थी या उसे जबरदस्ती चलने के लिए मजबूर किया गया। यह भी हो सकता है कि बिल्ली इतने सारे चूहे खाने के बाद काफी मोटी हो गई हो और डायटिंग करने के लिए चल दी हो। 






कहावत से यह बात साफ लगाती है कि बिल्ली मुस्लिम धर्म को मानती है क्योंकि हज पर सिर्फ मुस्लिम धर्म के लोग ही जा सकते हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि यह कहावत तब सार्थक होती है, जब बहुत से गलत काम करने के बाद, कोई व्यक्ति अचानक से अच्छे काम करने की बात करने लगे। लेकिन यदि बिल्ली मुसलमान है तो चूहा खाना तो इस्लाम में वर्जित नहीं है, इसलिए बिल्ली ने कोई गलत काम नहीं किया तो कहावत का अर्थ पूर्णतः गलत है। 






अर्थात आप इतने सालों से कहावत को गलत उदाहरण के लिए प्रयोग कर रहें हैं। यदि आप को कहावत, सही मानना है तो बिल्ली को मुस्लिम धर्म से अलग करना होगा। यदि बिल्ली इस्लाम धर्म नहीं मानती तो फिर बिल्ली हिन्दू धर्म की होगी और यदि बिल्ली हिंदू धर्म की है तो वो बनारस, हरिद्वार, संगम और गया जायेगी। यदि कोई हिंदू बिल्ली को हज पर भेज रहा है तब वह समाज के पसरे हिंदू - मुस्लिम प्यार को भंग करना चाहता है।






भारत से हज की हवाई दूरी चार हजार किलोमीटर है। क्या बिल्ली इतने दूर, उड़कर गई होगी? यदि वो विमान से गई होगी तो उसका पासपोर्ट भारत में नहीं बन सकता है। क्योंकि बिल्ली पुलिस को वेरिफिकेशन के दो सौ रुपये कहाँ से देगी। इसका मतलब बिल्ली भारतीय नहीं है। और जब बिल्ली भारतीय नहीं है तो वो चूहे खाये - ना खाये। हज पर जाये - ना जाये। हमें आपको क्या करना है। 






चूँकि इस कहावत में बिल्ले का जिक्र नहीं है। इसका मतलब कहावत लिखनेवाला सिर्फ बिल्ली - मादा प्रजाति को ही गलत काम करने का दोषि बता रही है। जिससे महिलाओं के चरित्र पर कीचड़ उछाला जा रहा है, जो सरासर गलत है। 






यह कहावत किसी भी तरह से कहावत की परिपाठी में नहीं बैठती है इसलिए इस कहावत को तत्तकाल समय से रद्द किया जाता है। 





​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

5 comments:

  1. कहावत तो हम सभी ने सुन रखी है लेकिन हम कभी भी किसी बात पर इतना मनन कहा करते है? बिल्ली चूहे खाकर हज को गई। गई। ठीक है।
    यदि वास्तव में हम सब ऐसा गहन सोचने लगे तो हमे सभी समस्याओं का समाधान मिल सकता है। खैर।
    पढ़ते वक्त वास्तव में मजा आ गया।

    ReplyDelete
  2. हा हा बहुत मजेदार. इस कहावत में कई लोगों की भावनाएं आहत करने की क्षमता है. मुझे हैरत है इतने दलों में से किसी ने भी इसके लिए आवाज़ क्यों नहीं उठाई. मुझे इसमें कई संभावना दिखती हैं. हा हा

    ReplyDelete
    Replies
    1. इसे चुनावी मुद्दा बना देते हैं

      Delete
  3. बेनामीMay 5, 2017 at 9:47 PM

    Achhi rachna hai. Badhai !

    ReplyDelete

Tricks and Tips