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तीन साल में कुछ भी तो नहीं बदला मोदी जी

प्यारे प्रधानमंत्री मोदी जी,

2014 में जब आपने भारत के लोकतंत्र पर अपनी विजय पताका का ध्वज रोहण किया तो मुझे लगा की एक नए युग का आरंभ हो चुका है। मुझे लगा कि आपके प्रधानमंत्री बनने के बाद समोसे और मिठाई आसमान से गिरेंगे और पतियों के ऊपर पत्नियों द्वारा किया जानेवाला, अत्याचार बंद हो जाएगा। परंतु सत्य का अनुभव थोड़ा देरी से हुआ और इस सत्य का ज्ञान हुआ कि 2014 के चुनावों में आपने जो वादे किए थे, उन्हें तो आपके पांच साल के कार्यकाल में पूरा करना असंभव है। आपने तो एक ख़याली पुलाव हम सब को विकास के नाम पर खिला दिया। 

एक महान पश्चिम दार्शनिक ने कहा, "जो नेता जनता को अपनी बातों से ठग लेता है वो चुनाव में विजय प्राप्त कर लेता है।"  ठगने वाली बात का बुरा मत मानना क्योंकि श्री कृष्ण ने धर्म की स्थापना के लिए लोगों को ठगने का व्यवहार किया था। वैसे आपके जैसे ही केजरीवाल ने भी लोगों को ठग लिया है और वो उसके बावजूद अपना सीना चीरकर, यह सत्य दिखाने के लिए तैयार हैं कि उन्होंने कोई ठगी नहीं की है। क्या आप भी छाती चीरकर यह सत्य दिखा सकते हैं?

मोदी जी धीरे - धीरे आपके प्रशासन को तीन साल हो गया। कुछ लोग कहते हैं कि काम हो रहा है और कुछ कहते हैं कि काम नहीं हो रहा है। मेरे लिए ट्रेन और सड़क यात्रा आज भी उतनी ही परेशानी का सबब रहती है, जितना आपके पहलेवाले वाले प्रधानमंत्रियों के शासन काल में हुआ करती थी। तो आपके प्रधान सेवक बनने का मुझे तो कोई बड़ा लाभ नहीं दिख रहा है। यदि कुछ बदला है तो नए सरकारी कार्यक्रमों के ऐलान में इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की जगह आपकी और दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर अखबार में छपने लगी है। 

मोदी जी लोगों ने बहुत कहा कि आप जुमले बाजी में अव्वल हैं। काम करने के बदले जुमले सुनना और हमेशा पालिका चुनाव से लेकर उप चुनाव तक में प्रचार करना ही आपके जीवन का लक्ष्य है। परंतु मैंने लोगो का विश्वास नहीं किया। क्योंकि केजरीवाल भी आज कल विश्वास से डरने लगे हैं तो मेरा डरना लाज़मी हैं क्योंकि ट्विटर पर कभी - कभी आउटरेज करती आज़मी है। वैसे मेरे पड़ोस की एक लड़की अपने नर्सरी क्लास की मॉनिटर बन गई। वो भी चुनाव के समय आपका चेहरा साथ लेकर कक्षा के विद्यार्तियों के बीच गई थी। आज कल आलम यह है कि कभी किसी न्यूज़ चैनल पर आपका भाषण आ रहा होता है तो चैनल बदल देता हूँ। 

कुछ महीने पहले आपकी सरकार ने ndtv नाम के एक समाचार चैनल को एक दिन के लिए बैन करने का नोटिस दिया। सबसे पहले तो चैनल को बंद करना गलत था। यदि उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया था तो उन्हें किसी तरह का जुर्माना लगाना चाहिए था। जब आपके समर्थक दिन रात सोशल मीडिया पर ndtv के एक दिन के बंद को सही ठहराने के लिए तर्क कुतर्क कर रहें थे, तब अचानक से आपकी सरकार ने बैन को रद्द कर दिया। ndtv को बैन करना ही गलत था लेकिन बैन करने के 1001 कारण बता रहे, अपने समर्थकों को बैन रद्द करके ठगना उससे भी अधिक गलत था।

देश भर में 500 और 1000 की नोट जब आप के द्वारा बंद करने पर, जनता की परेशानी का विवरण मेरे करने पर भी आपको शायद समझ ना आए परंतु जनता आपकी इस नीति से प्रसन्न दिख रही थी। जनता को लगा आप काले धन को मिटाकर जनता को पुनः एक ऐसा भारत देंगे जहाँ रोटी, कपड़ा और मकान कम दामों में मिलेगा। लेकिन मेरा देश बदल रहा है - सिर्फ सरकारी पैसों से बनने वाले विज्ञापनों में ही नजर आता है। धरातल पर कुछ भी बदला हुआ नहीं दिखता है। 

माना जाता है कि आपके ऊर्जा मंत्री और रेल मंत्री दिन रात विकास को नई गति दे रहें हैं। यह सुनकर आपको बताता चलूँ कि मुंबई से सटे वसई इलाके में शुक्रवार को सभी कारखाने बंद रहते हैं क्योंकि शुक्रवार को दिनभर बिजली नहीं आती है। जब मुंबई से सटे औद्योगिक जगहों का यह हाल है तो भारत के दूरगामी इलाकों में आपके ऊर्जा मंत्री ने कुछ किया होगा लगता नहीं है। और हाँ ऊर्जा के नाम पर याद आया कि रसोई गैस की कीमत मनमोहन जी के समय से भी अधिक हो गई है। 

वहीं रेल का पूरा विकास PR द्वारा सोशल मीडिया पर होता दिख रहा है। क्योंकि मैं तो आज भी भेड़ - बकरियों की तरह ही मुंबई लोकल तबेला में यात्रा कर रहा हूँ। गाय वाला पंच पुराना है लेकिन मार देता हूँ - कभी कभी तो लगता है यदि मैं गाय होता तो आपके शासन काल में अधिक सुरक्षित होता और मेरे यात्रा करने के लिए आप खास ध्यान देते। 

आज कल चर्चा में है की IT वाले लोगों को काम से निकाल रहें हैं। मेरे सूत्रों से पता चला है कि आप जानबूझकर लोगों को काम से निकलवा रहें है, जिससे लोग सड़क पर ठेले लगाकर मेक इन इण्डिया को प्रमोट कर सकें। क्या यह बात है सच है ? नहीं है तो इतनी बकलोली क्यों करते हो मोदी जी?

क्या आप मुक्का मारकर प्याज तोड़ लेते हो ? यदि नहीं तो मैं आपको देश का प्रधानमंत्री नहीं मान सकता हूँ।



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