सर संघ चालक मोहन भागवत के नागपुर से एक भाषण दिया। बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। संस्कृत के श्लोकों से ओत पोत भागवत जी की बयान इस बात पर था कि दो राजनैतिक दलों को चुनाव के बाद सहमति बनाकर चलना चाहिए।
भागवत के बयान के बाद भेड़ की खाल ओढ़कर घूम रहे भेड़िए जग गए। उन्हें लगा भागवत का पूरा बयान नरेंद्र मोदी को खरी खोटी सुनने के लिए दिया गया है। बस होना क्या था, मोदी विरोधी निकल पड़े सड़कों पर खाकी रंग की निक्कर खरीदने।
एक पत्रकार साहब जिनकी पत्नी अब राज्यसभा में सांसद हैं, वो तो खाकी रंग की निक्कर ले आए, जिसपर जॉकी का बिल्ला भी लगा हुआ था और वो खाकी निक्कर पहनकर दिल्ली की सड़कों पर नाचने लगे और बोले मेरा बचपन से खाकी निक्कर पहनने का सपना आज पूरा हुआ।
वहीं उनकी सांसद पत्नी ने खाकी रंग की बिकनी भी खरीद ली, जिसे खरीदते समय खान मार्केट की कई महिलाओं ने उन पर तंज भी कसे। जिसके बाद मोहतरमा ने खाकी रंग का हिजाब भी खरीद लिया।
स्मृति ईरानी पर तंज कसने वाली भी कई मायावी महिलाओं ने खाकी रंग की निक्कर खरीद ली और उसे अपने पैंट के ऊपर से पहनकर सुपर वुमन बन गई। कई मायावी लिबरल महिलाएं तो खाकी निक्कर को सिर पर पहनकर भी चल रहीं हैं।
वहीं दिल्ली का खान मार्केट अचानक से बढ़ी खाकी निक्कर की डिमांड से परेशान है क्योंकि वो तो चांद छपी हरे रंग की निक्कर बेचने के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं राहुल गांधी भी अपनी अगली भारत जोड़ो यात्रा में खाकी रंग की पैंट पहनेंगे जिसका माप इस लेख के लिखे जाने तक रवीश कुमार ने ले लिया था।
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